DSP से ASP बने अनुज चौधरी, कंधे पर लगा अशोक स्तंभ, कभी रोक दी थी आजम खान की एंट्री
Anuj Chaudhary Promotion: संभल की चंदौसी सर्किल में तैनात 'दबंग' सीओ अनुज चौधरी का प्रमोशन हो गया है। अब उनके कंधों पर स्टार की जगह अशोक स्तंब लग चुके हैं और वह DSP से ASP बन गए हैं।
- Written By: अभिषेक सिंह
अनुज चौधरी के कंधे पर अशोक स्तंभ लगाते हुए SP राजीव कृष्ण (सोर्स- सोशल मीडिया)
Anuj Chaudhary Promotion: संभल के चंदौसी सर्किल में तैनात सीओ अनुज चौधरी का प्रमोशन हो गया है। उन्हें अपर पुलिस अधीक्षक यानी एएसपी के पद पर पदोन्नत किया गया है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई और एएसपी राजेश कुमार ने उनके दोनों कंधों पर अशोक स्तंभ लगाकर उन्हें बधाई दी।
यह समारोह शनिवार को संभल जिले के बहजोई स्थित पुलिस अधीक्षक आवास पर आयोजित किया गया। अनुज चौधरी 2012 बैच के पीपीएस अधिकारी हैं। उनकी भर्ती खेल कोटे से हुई थी और वे इस कोटे से एएसपी के पद तक पहुंचने वाले पहले यूपी पुलिस अधिकारी बन गए हैं।
अनुज चौधरी ने पूरे किए 12 साल
सीओ से एएसपी बनने के लिए 12 साल की सेवा आवश्यक है। 2012 बैच में केवल चौधरी ने ही यह अवधि पूरी की है। इस बैच की भर्ती 2014 में हुई थी, इसलिए किसी और को प्रमोशन नहीं मिला।
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कब चर्चा में आए थे अनुज चौधरी?
अनुज चौधरी अपने दबंग अंदाज के लिए जाने जाते हैं। ‘होली एक जुम्मे 52’ कहकर वे चर्चा में आए थे। दिसंबर 2024 में जब किष्किंधा रथ संभल तीर्थ की परिक्रमा के लिए आया, तो उन्हें सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान 46 साल बाद खुले कार्तिक महादेव मंदिर के दर्शन करने के बाद महंत ने हनुमान जी की गदा सीओ अनुज चौधरी को सौंपी, जिसके साथ रथ यात्रा शुरू हुई।
रोक दी थी आजम खान की एंट्री
अनुज चौधरी पहले भी विवादों में रहे हैं। उन्होंने प्रशासनिक नियमों के तहत सपा नेता आजम खान को प्रवेश करने से रोक दिया था। इसके बाद उनका विवाद और बढ़ गया। संभल हिंसा के बाद उनके विरुद्ध जांच शुरू की गई थी, लेकिन बाद में उस जांच को रोक दिया गया। पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने इस पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद दोबारा जांच हुई, जिसमें अनुज को क्लीन चिट मिल गई।
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बता दें कि अनुज चौधरी मुजफ्फरनगर के बहेड़ी गांव के रहने वाले हैं। जो कि, अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान भी रहे हैं। उन्होंने कुश्ती में भारत का नाम रोशन किया है। वह 1997 से 2014 तक राष्ट्रीय चैंपियन रहे। उन्होंने 2002 और 2010 के राष्ट्रीय खेलों में दो रजत पदक जीते। उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में भी दो कांस्य पदक जीते हैं। साल 2001 में उन्हें लक्ष्मण पुरस्कार और 2005 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
