UPPSC में योग, संस्कृति और शिक्षा का संगम, जस्टिस विक्रम नाथ ने किया योगपीठम् का उद्घाटन

UPPSC परिसर में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आदित्य पतंजलि योगपीठम् का उद्घाटन और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने भर्ती में योग्यता पर जोर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने किया स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा का अनावरणSource- navbharat
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  • न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने UPPSC परिसर में नवनिर्मित आदित्य पतंजलि योगपीठम् का उद्घाटन और स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया।

  • उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में व्यक्तिगत पहचान या अनुग्रह नहीं, बल्कि पात्रता और योग्यता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

  • कार्यक्रम में वृंदावन ऑफिसर्स आवास के 12 नवनिर्मित आवासों का लोकार्पण और आयोग के कैलेंडर का विमोचन भी किया गया।

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के परिसर में मंगलवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आयोग परिसर में नवनिर्मित 'आदित्य पतंजलि योगपीठम्' का उद्घाटन किया और स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया। आयोग के मुताबिक, उसके इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवारत न्यायमूर्ति ने परिसर का आधिकारिक दौरा किया।

कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता और योग्यता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालय में प्रभाव या सत्ता नहीं, बल्कि साक्ष्य और तर्क का महत्व होता है। इसी तरह भर्ती में भी व्यक्तिगत पहचान या अनुग्रह के बजाय पात्रता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

केवल योग्यता को मिले प्राथमिकता: जस्टिस विक्रम नाथ

अपने संबोधन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आयोग के परिसर, यहां मौजूद कलात्मक कृतियों और चयन प्रक्रिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में अनुच्छेद 315 से 323 तक लोक सेवा आयोगों की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली से जुड़े व्यापक प्रावधान किए गए हैं, ताकि आयोग निष्पक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।

उन्होंने कहा, “न्यायालय में प्रभाव या सत्ता नहीं, साक्ष्य और तर्क बोलते हैं। ठीक उसी प्रकार भर्ती में अनुग्रह या पहचान नहीं, केवल पात्रता बोलती है।” उन्होंने यह भी कहा कि न्याय और चयन, दोनों के केंद्र में व्यक्तिगत पहचान के बजाय योग्यता होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि लोक सेवा आयोग का काम केवल परीक्षाएं आयोजित करना नहीं है, बल्कि राष्ट्र के भविष्य के लिए योग्य लोकसेवकों का चयन करना भी है। उनके अनुसार, एक अधिकारी का चयन केवल किसी व्यक्ति को रोजगार देने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसका प्रभाव आने वाले वर्षों के शासन और प्रशासन पर भी पड़ता है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी संस्था के लिए निष्पक्ष होना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसका निष्पक्ष दिखाई देना भी है।

न्यायपालिका और चयन संस्थाओं का मूल तत्व लोक विश्वास

कार्यक्रम में यूपीपीएससी के अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का स्वागत किया। उन्होंने न्यायपालिका और चयन संस्थाओं के बीच संबंधों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि दोनों के कार्यक्षेत्र अलग हैं, लेकिन उनकी वैधानिक आत्मा का मूल तत्व लोक विश्वास है।

संजय श्रीनेत के मुताबिक, न्यायपालिका नागरिकों को न्याय का कानूनी आश्वासन देती है, जबकि चयन संस्थाएं उन्हें समान अवसर का संवैधानिक विश्वास प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता आवश्यक हैं।

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योग और सांस्कृतिक विरासत की झलक

आयोग परिसर में बनाए गए 'आदित्य पतंजलि योगपीठम्' को योग और आध्यात्मिक प्रेरणा के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां सूर्य नमस्कार की विभिन्न मुद्राओं को प्रदर्शित किया गया है। साथ ही, भारत के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के योगदान को भी दर्शाया गया है, ताकि अभ्यर्थियों को देश की बौद्धिक उपलब्धियों से प्रेरणा मिल सके।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कार्यक्रम के दौरान 'बोधि संगम' का भी निरीक्षण किया। इसे अभ्यर्थियों के लिए आत्मचिंतन और आत्म-संवाद के स्थल के रूप में तैयार किया गया है।

उन्होंने 'कल्पवृक्ष संग्रहालय' का भी अवलोकन किया। आयोग के अनुसार, वर्ष 1868 में ब्रिटिश कालीन क्लब के रूप में बने इस भवन का इस्तेमाल बाद में स्टोर हाउस के तौर पर हुआ। अब इसे सांस्कृतिक विरासत और सकारात्मक ऊर्जा के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने परिसर में स्थित 'हल्दीघाटी शौर्य स्थल' का भी निरीक्षण किया, जहां स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी प्रतिकृतियां, स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां और राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ स्थापित हैं।

12 नवनिर्मित आवासों का लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने 'वृंदावन ऑफिसर्स आवास' के 12 नवनिर्मित आवासों का लोकार्पण किया। इसके साथ ही आयोग के आधिकारिक कैलेंडर का विमोचन भी किया गया।

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आयोग में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कई अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इनमें अनुसचिव ओंकारनाथ सिंह, वरिष्ठ अनुसेवक प्रेम चंद्र मौर्य, निजी सचिव श्रीनाथ, अनुभाग अधिकारी प्रकाश चंद्र सिंह, दिनेश प्रताप पाण्डेय और रमेश कुमार भारती, समीक्षा अधिकारी वीरेंद्र सिंह तथा वरिष्ठ अनुसेवक फूल चंद्र शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान आयोग के सदस्य मेजर जनरल (डॉ.) मनोज कुमार ने आयोग की आधुनिक कार्यप्रणाली और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। अंत में आयोग के सदस्य डॉ. ए.के. वर्मा ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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