4 महीने में 48 महिलाओं की मौत से हड़कंप! प्रयागराज में स्वास्थ्य महकमे पर भड़के कमिश्नर, दिए जांच के निर्देश

Prayagraj Maternal Mortality Cases: प्रयागराज में 4 महीने में 48 महिलाओं की मौत पर मंडलायुक्त ने नाराजगी दिखाई है। अवैध नर्सिंग होम बंद करने और हर मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब करने का निर्देश दिया।
Prayagraj Health Department Action
प्रयागराज में महिलाओं की मौत के बढ़ते मामलों पर मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने की बैठकसोर्स- सोशल मीडिया
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Prayagraj Health Department Action: प्रयागराज जिले में प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी अस्पतालों में पिछले चार महीनों के दौरान प्रसव के समय 25 महिलाओं समेत कुल 48 महिलाओं की मौत का मामला सामने आया है। आंकड़ों को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने नाराजगी जताई है और प्रत्येक मृत्यु के कारणों का विस्तृत विश्लेषण कर सुधारात्मक कार्रवाई के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मंडलायुक्त ने दिया सख्त निर्देश

गांधी सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मंडलायुक्त ने जिलों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रसव के मामलों में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि आशा, आंगनबाड़ी या अन्य संबंधित कर्मियों की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में निर्देश दिया गया कि जिलों में एक-एक सीएचसी-पीएचसी और सब-सेंटर को एक्वावास स्तर पर विकसित किया जाए। मॉडल सीएचसी की चेकलिस्ट के अनुसार आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।

Prayagraj Maternal Mortality Cases
प्रयागराज में महिलाओं की मौत के बढ़ते मामलों पर मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने नाराजगी जताई।सोर्स- AI

एमओआईसी की समिति गठित करने का दिया निर्देश

मंडलायुक्त ने होलागढ़ सीएचसी को मॉडल स्तर की सीएचसी बनाने के लिए सीएमओ, संयुक्त मजिस्ट्रेट जसरा और एमओआईसी की समिति गठित करने का निर्देश दिया। साथ ही अनधिकृत और निम्न स्तर के नर्सिंग होम व नर्सिंग केंद्रों में प्रसव कराए जाने के मामलों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए ऐसे संस्थानों को बंद कराने के निर्देश दिए गए।

स्थिति में सुधार न होने पर दी चेतावनी

प्रसव के कारणों में होने वाले अंतर की केस स्टडी तैयार करने के लिए संयुक्त मजिस्ट्रेट जसरा को गर्भधारण और प्रसव के स्थानों का विश्लेषण करने को कहा गया है। गंभीर तीव्र कुपोषित (सैम) और मध्यम तीव्र कुपोषित (मैम) बच्चों की स्थिति में सुधार न होने पर भी चेतावनी दी गई।

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जल जीवन मिशन में चारों जिलों की डी श्रेणी पर नाराजगी जताते हुए एक्सईएन को परियोजना स्थलों की प्रगति तेज करने के निर्देश दिए गए। गोशालाओं में स्वच्छता, जल निकासी, चिकित्सा कक्ष और गोबर बायोगैस प्लांट विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

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