प्रारंभिक प्रस्ताव में छह जिलों को शामिल करने की थी तैयारी
अब प्रतापगढ़ और महोबा भी आयेंगे दायरे में
इसका उद्देश्य क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना
Prayagraj-Chitrakoot RDA: प्रयागराज और चित्रकूट मंडल सहित आसपास के आठ जिलों के समग्र विकास की दिशा में पहल तेज हो गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की तर्ज पर प्रस्तावित प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के दायरे में अब आठ जिले शामिल होंगे। पहले छह जिलों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी थी, लेकिन अब प्रतापगढ़ और महोबा को भी प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने प्राधिकरण के गठन का मसौदा तैयार कर शासन को भेज दिया है। शासन की मंजूरी के बाद इसके गठन की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
प्रस्तावित क्षेत्रीय प्राधिकरण में प्रयागराज, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, कौशाम्बी, फतेहपुर, महोबा और प्रतापगढ़ शामिल होंगे। इस पूरे क्षेत्र के सुनियोजित विकास की जिम्मेदारी प्रयागराज विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी के रूप में सौंपी गई है। प्राधिकरण के गठन का उद्देश्य आठों जिलों की भौगोलिक, आर्थिक और विकास संबंधी संभावनाओं को एक साझा योजना के तहत आगे बढ़ाना है।
प्रस्तावित प्राधिकरण के तहत आठों जिलों के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर रहेगा। प्रयागराज, चित्रकूट सहित अन्य जिलों में मौजूद धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकेंगे।
क्षेत्रीय विकास की योजना केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगी। कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के साथ औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा। आठों जिलों की स्थानीय जरूरतों और संसाधनों के आधार पर विकास की रूपरेखा तैयार होगी। इससे आर्थिक गतिविधियों को गति देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रारंभिक प्रस्ताव में छह जिलों को शामिल करने की तैयारी थी, लेकिन अब प्रतापगढ़ और महोबा को भी इसमें शामिल किया गया है। पीडीए उपाध्यक्ष ऋषिराज के मुताबिक, प्राधिकरण का मसौदा तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। गठन के बाद आठों जिलों की जरूरतों और विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखकर विस्तृत खाका तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना और सभी जिलों का संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।