

Allahabad High Court Illegal Detention Compensation: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा लोगों को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखे जाने के मामलों को गंभीरता से लिया है। देवरिया जिले के गौरीबाजार थाने में चार व्यक्तियों को अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन याचियों को 20-20 हजार रुपये और एक याची को पांच हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के बाद जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के वेतन से मुआवजे की राशि वसूल की जाए।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिनेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी डॉ. महेंद्र कुमार के आचरण पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने इसे उनकी सर्विस बुक में दर्ज करने का भी निर्देश दिया। याचियों की ओर से अधिवक्ता अजीत कुमार श्रीवास्तव और प्रीति चौधरी ने पक्ष रखा। याचियों का आरोप था कि हत्या के एक मामले की जांच के नाम पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में रखा था।
कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए हिरासत में रखना गंभीर विषय है। पुलिस कार्रवाई में कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
एक अन्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चित्रकूट पुलिस की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए गोरखपुर निवासी कारोबारी रविंद्र दुबे की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सददेव की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि यदि याची किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए। अदालत ने अवैध हिरासत के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह राशि जांच के बाद दोषी पुलिसकर्मी से वसूल की जाएगी।
हाईकोर्ट ने सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे चालू रखने का निर्देश दिया है। कैमरा खराब होने पर इसकी सूचना जनरल डायरी में दर्ज कर पुलिस प्रमुख को अवगत कराने को कहा गया है। हिरासत और रिहाई का समय भी रिकॉर्ड किया जाएगा तथा संबंधित व्यक्ति को इसकी पावती दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला बालू खनन से जुड़े कारोबार से संबंधित है और पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।