

हंडिया के घाटों पर पुलिस ने लगवाए जागरूकता बोर्ड
नदी के किनारे सावधानी बरतने की अपील
गहराई का अंदाजा न लगने से हादसों की आशंका
Prayagraj Ganga River Strong Current: गंगा नदी में तेज बहाव और किनारों पर बालू के कटान को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस सतर्क हो गई है। हंडिया क्षेत्र में गंगा घाटों पर संभावित खतरे को देखते हुए थाना प्रभारी की ओर से चेतावनी बोर्ड लगवाए गए हैं। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं से गंगा में स्नान नहीं करने और नदी के किनारे सावधानी बरतने की अपील की गई है। चेतावनी बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि तेज बहाव और बालू कटान के कारण घाट असुरक्षित हैं। ऐसे में श्रद्धालु अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और जोखिम उठाने से बचें।
गंगा घाटों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग स्नान, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। पर्वों, विशेष तिथियों और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से नदी किनारे लोगों की आवाजाही भी अधिक हो जाती है। ऐसे में गंगा के जलस्तर और बहाव में बदलाव के साथ बालू के कटान से खतरा बढ़ सकता है। ऊपर से सामान्य दिखाई देने वाले घाटों के आसपास पानी की गहराई और नदी तल की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इससे अनजान श्रद्धालु अनजाने में गहरे पानी या तेज धारा की चपेट में आ सकते हैं।
गंगा नदी के किनारे बालू का कटान होने से कुछ स्थानों पर जमीन कमजोर हो सकती है। ऐसे में किनारे के बेहद करीब जाना या ढलान पर खड़े होकर स्नान करना जोखिम भरा हो सकता है। नदी की धारा तेज होने पर संतुलन बिगड़ने से भी व्यक्ति पानी में बह सकता है। खासकर बच्चों और तैरना नहीं जानने वाले लोगों के लिए ऐसी परिस्थितियां अधिक खतरनाक हो सकती हैं। इसलिए नदी किनारे मौजूद चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
हंडिया थाना प्रभारी की पहल पर घाटों पर लगाए गए बोर्ड के जरिए लोगों को संभावित खतरे के प्रति जागरूक किया जा रहा है। बोर्ड पर संदेश दिया गया है कि ‘आपकी सुरक्षा आपके हाथ में है।’ प्रयागराज पुलिस का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सतर्क करना और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को कम करना है।
श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे चेतावनी को गंभीरता से लें, नदी के तेज बहाव और कटान वाले स्थानों से दूर रहें तथा बच्चों को घाटों पर अकेला न छोड़ें। धार्मिक आस्था के साथ अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। जब तक घाटों पर स्थिति सुरक्षित न हो, तब तक गंगा में उतरने से परहेज करना ही बेहतर है।