जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल शिक्षक को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने सेवा समाप्ति का आदेश किया रद्द

Allahabad High Court: हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल बरेली के शिक्षक डॉ. मोहित भारद्वाज की बिना पर्याप्त सुनवाई सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दो महीने में नए सिरे से सुनवाई के निर्देश दिए।
Allahabad High Court Quashes Termination Order Against Teacher Over Jantar Mantar Protest
इलाहाबाद हाईकोर्ट(सोर्स- सोशल मीडिया)
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High Court Order On Teacher Termination Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में बरेली के गन्ना उत्पादक महाविद्यालय के स्ववित्तपोषित शिक्षक डॉ. मोहित भारद्वाज को बड़ी राहत दी है।

कोर्ट ने बिना कारण बताए और पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए बिना उनकी सेवा समाप्त करने के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने मामले को विश्वविद्यालय के सक्षम अनुशासनिक प्राधिकारी के पास नए सिरे से विचार के लिए वापस भेज दिया है।

डॉ. भारद्वाज को सुनवाई का पूरा अवसर देने का निर्देश

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी कर्मचारी को केवल शिकायतों के आधार पर बिना उचित प्रक्रिया अपनाए सेवा से नहीं हटाया जा सकता।

कोर्ट ने सक्षम अनुशासनिक प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के भीतर डॉ. भारद्वाज को सुनवाई का पूरा अवसर प्रदान करे। इसके बाद उनके जवाब और उपलब्ध सभी साक्ष्यों पर विचार करते हुए कानून के अनुसार कारण सहित नया आदेश पारित किया जाए।

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डॉ. मोहित भारद्वाज ने 22 जुलाई को दाखिल की थी याचिका

डॉ. मोहित भारद्वाज ने 22 जुलाई को जारी निष्कासन आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। आदेश में कहा गया था कि उनके खिलाफ बार-बार शिकायतें मिलने के बाद समिति ने उन्हें महाविद्यालय से तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने का निर्णय लिया है।

सेवा समाप्ति के आदेश में कारण स्पष्ट नहीं

याची की ओर से अधिवक्ता अभिनव मिश्रा ने दलील दी कि शिक्षक को न तो पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिया गया और न ही सेवा समाप्ति के आदेश में कोई स्पष्ट कारण बताया गया। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से पेश अधिवक्ता विपिन गंगवार ने स्वीकार किया कि नोटिस जारी कर जवाब लिया गया था, लेकिन बचाव पक्ष की दलीलों पर कोई विचार नहीं किया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश की भाषा से स्पष्ट है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। न्यायालय ने निर्देश दिया कि सक्षम अनुशासनिक प्राधिकारी दो महीने के भीतर शिक्षक को पूरा अवसर देकर उनके जवाब और सभी साक्ष्यों पर विचार करे तथा विधि के अनुरूप नया आदेश पारित करे।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी को केवल शिकायतों के आधार पर बिना कारण बताए सेवा से हटाया नहीं जा सकता। इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश से डॉ. भारद्वाज को फिलहाल राहत मिली है और उनकी सेवा समाप्ति का पूर्व आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।

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