हाईकोर्ट की सख्ती: शादी से मुकरने वाले आरोपी की जमानत रद्द, मेरठ एसएसपी को अदालत में खड़े रहने का निर्देश

High Court News: हाईकोर्ट ने शादी के आश्वासन से जमानत पाने वाले दुष्कर्म के आरोपी की जमानत निरस्त कर दी। गैर-जमानती वारंट के अनुपालन में देरी पर मेरठ SSP को अदालत में पेश होकर जवाब देना पड़ेगा।
Allahabad High Court Cancels Rape Accused's Bail After He Refuses to Marry Victim
कोर्ट का आदेश (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • मेरठ SSP को हाईकोर्ट में खड़े रहने का आदेश

  • NBW के पालन में देरी पर सख्ती

  • दुष्कर्म आरोपी को देर से पेश करने पर कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया

Allahabad High Court Verdict Rape Case Bail दुष्कर्म के मामले में शादी के आश्वासन पर जमानत पाने वाले आरोपी के मुकरने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने आरोपी की जमानत निरस्त कर दी। वहीं, अदालत के आदेश के बावजूद आरोपी को समय पर पेश नहीं किए जाने के मामले में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बीबीजीटीएस मूर्ति को सुनवाई के दौरान पूरे समय अदालत में खड़े रहने का निर्देश दिया। अदालत ने गैर-जमानती वारंट (NBW) के अनुपालन में हुई देरी पर पुलिस की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए।

पीड़िता से शादी की शर्त पर मिली थी जमानत

मामला मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र से जुड़ा है। आरोपी नितीश उर्फ सेठी उर्फ सिद्धांत के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज था। पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि आरोपी ने उससे शादी करने की शर्त पर जमानत हासिल की थी, लेकिन बाद में वह अपने वादे से मुकर गया। इसके बाद पीड़िता ने आरोपी की जमानत निरस्त करने की मांग की।

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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आरोपी को पेश करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके बावजूद आरोपी को अदालत में पेश करने में देरी हुई। इस पर हाईकोर्ट ने मेरठ के एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।

गैर जमानती वारंट के अनुपालन में देरी पर एसएसपी से जवाब-तलब

सुनवाई के दौरान एसएसपी ने अदालत को बताया कि आरोपी को पहले पेश नहीं किया जा सका, क्योंकि गैर-जमानती वारंट के अनुपालन में उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के समक्ष पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की ओर से जारी गैर-जमानती वारंट का पालन सुनिश्चित कर आरोपी को हाईकोर्ट में पेश कराना एसएसपी की जिम्मेदारी थी। अदालत ने इस मामले में मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी सवाल उठाए और संबंधित प्रशासनिक न्यायाधीश को उनके खिलाफ कार्रवाई पर विचार करने का निर्देश दिया।

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आरोपी के इनकार पर जमानत निरस्त

सुनवाई के दौरान आरोपी अदालत में पेश हुआ, लेकिन उसने पीड़िता से शादी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस जमानत को निरस्त कर दिया, जो शादी करने के आश्वासन के आधार पर दी गई थी।

अदालत ने एसएसपी को भविष्य में न्यायिक आदेशों के अनुपालन में अधिक सतर्कता बरतने की हिदायत भी दी। मामले में अदालत की सख्ती को पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही और न्यायिक आदेशों के समय सीमा के अंदर अनुपालन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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