UP में सियासी हलचल तेज...BJP अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार केशव प्रसाद मौर्य से मिले पंकज चौधरी

Pankaj Chaudhary and Keshav Prasad Maurya: यूपी भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी ने पहली बार डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की है। दोनों ने आगामी चुनाव पर विस्तुत चर्चा की।
Political activity intensifies in UP... Pankaj Chaudhary meets Keshav Prasad Maurya for the first time since becoming BJP president
पंकज चौधरी और केशव प्रसाद मौर्य। इमेज-सोशल मीडिया
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UP BJP News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की है। यूपी अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली बार है, जब दोनों नेता ने औपचारिक भेंट की है। उन्होंने राजनीतिक मुद्दों और पार्टी की रणनीति पर चर्चा की। वैसे, इसे मुलाकात के बाद सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य उनके लखनऊ स्थित सरकारी आवास, सात कालिदास मार्ग पर पंकज चौधरी से मुलाकात की। उनके साथ पूर्व सांसद रविंद्र कुशवाहा भी मौजूद रहे। दोनों ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की। पंकज चौधरी ने पोस्ट में लिखा- आज लखनऊ में यूपी सरकार में माननीय उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या से शिष्टाचार भेंट।

केशव ने बताया शिष्टाचार मुलाकात

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने तस्वीरें शेयर कर एक्स पर लिखा-लखनऊ स्थित सरकारी आवास, सात कालिदास मार्ग पर माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी और पूर्व सांसद रविंद्र कुशवाहा से मिले।

ओबीसी वोट बैंक को लेकर चर्चा तेज

पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद केशव प्रसाद मौर्य पहली मुलाकात पर सियासत तेज है। इसे संगठन और सरकार में तालमेल बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा। पंकज चौधरी को ओबीसी चेहरे के रूप में यूपी भाजपा की कमान दी गई है, जिससे कुर्मी, मौर्य और कुशवाहा समाज पर पार्टी की पकड़ मजबूत हो। राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को उत्तर प्रदेश में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से भी जोड़कर देख रहे। उनका कहना है भाजपा सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल रखना चाहती है, जिससे दोनों में गैप न रहे और पार्टी एकजुट होकर चुनावी मैदान में दिखाई दे।

लोकसभा चुनाव में OBC वोटरों का BJP को हुआ था नुकसान

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को ओबीसी वोटों में काफी नुकसान हुआ था। समाजवादी पार्टी की पीडीए के नारे की वजह से बड़ी संख्या में उन्होंने भाजपा के ओबीसी वोटरों में सेंध लगाई। अब भाजपा इस वोट बैंक को वापस पार्टी से जोड़ना चाहती है।

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