
नोएड़ा में मृत इंजीनियर की तस्वीर, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Noida Engineer Death Case: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने जांच के बाद अभय कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि इंजीनियर की मौत के मामले में उनकी भूमिका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबने से हुई मौत का मामला दिन-ब-दिन तूल पकड़ता जा रहा है। हादसे के बाद नोएडा अथॉरिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मौके पर सुरक्षा के सही इंतजाम होते, तो इस जानलेवा घटना को रोका जा सकता था।
हादसे के चार दिन बाद भी प्रशासन वाहन को बाहर नहीं निकाल पाया है। यह दुर्घटना रात करीब 11:45 बजे हुई थी। इसके बाद युवराज करीब दो घंटे तक मदद के लिए आवाज लगाता रहा। सूचना मिलने पर रात 12:06 बजे फायर ब्रिगेड को कॉल की गई और 12:25 बजे तीन दमकल वाहन घटनास्थल पर पहुंचे। पूरी रात चले रेस्क्यू के दौरान तड़के 3:30 से 4:00 बजे के बीच एसडीआरएफ की टीम पहुंची, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल सकी।
हादसे के बाद युवराज डूबती कार में फंसा रहा और करीब दो घंटे तक मदद के लिए चीखता रहा। जब सरकारी तंत्र की ओर से कोई गोताखोर पानी में नहीं उतरा, तब एक स्थानीय व्यक्ति ने साहस दिखाया। उसने अपनी कमर में रस्सी बांधी और करीब 50 मीटर तक पानी के भीतर जाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और युवराज का पता नहीं चल सका। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मौके पर पुलिस और फायर ब्रिगेड मौजूद थीं, लेकिन हालात के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई, जिससे सिस्टम की सुस्ती उजागर हुई।
हादसे के बाद घटनास्थल पर सब-इंस्पेक्टर शिव प्रताप और थाना प्रभारी भी मौजूद थे। फायर विभाग ने तुरंत गोताखोरों और एसडीआरएफ को बुलाने की मांग की थी, लेकिन एसडीआरएफ की टीम तड़के करीब 4 बजे पहुंच सकी। सुबह 6 बजे तक चला शुरुआती रेस्क्यू अभियान बेनतीजा रहा और युवराज की जान नहीं बचाई जा सकी।
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आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी जिले के डीएम के पास होती है, लेकिन नोएडा की डीएम मेधा रूपम चार दिन बीत जाने के बावजूद घटनास्थल पर नहीं पहुंचीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां डीएम को मौके पर रहकर रेस्क्यू की कमान संभालनी चाहिए थी, वहां केवल एक एसडीएम औपचारिक दौरे के लिए पहुंचे। इसी लापरवाही के चलते चार दिन बाद भी कार पानी में ही फंसी हुई है।






