बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां ने तोड़ा दम, UP की इस घटना से आपकी आंखें भी होंगी नम

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के जालौन में बेटे की मौत का सदमा मां बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसकी भी मौत हो गई। गांव में एक ही घर से मां-बेटे का साथ अर्थी उठने से गम का माहौल है।
Mother dies after hearing news of son death in UP
मां और बेटे। जिनकी कुछ ही घंटे के अंतराल के बाद से मौत से पूरा गांव गमगीन है।
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Mother Also Died After Son Death: उत्तर प्रदेश में एक हृदयविदारक घटना हुई है। इस घटना के बारे में सुनकर या पढ़कर हर किसी की आंखें नम हो जा रहीं। दरअसल, यूपी के जालौन अंतर्गत रेढ़र थाना क्षेत्र के बुढ़ावली गांव में बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद उसकी मां ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद एक ही घर से मां-बेटे की साथ अर्थी निकली। इस घटना से पूरे गांव में गम का माहौल है।

सैलून चलाकर परिवार का करते थे भरण-पोषण

बुढ़ावली गांव के रहने वाले हरिप्रकाश याज्ञिक उर्फ छौना (39 वर्ष) वर्तमान में माधौगढ़ के मालवीय नगर में सैलून चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। बृहस्पितवार की दोपहर हरिप्रकाश सैलून में बाल काट रहे थे, उसी दौरान सीने में अचानक तेज दर्द उठा। परिजन उन्हें माधौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए हरिप्रकाश को उरई मेडिकल कॉलेज रेफर किया। देर रात हालत बिगड़ने पर मरीज को झांसी मेडिकल कॉलेज भेजा गया। मगर, शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

बुढ़ावली गांव में छाया मातम

शुक्रवार की दोपहर में हरिप्रकाश का शव बुढ़ावली गांव पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही उनकी मां किशोरी देवी (72 वर्ष) गिर पड़ीं। कुछ देर में उनकी भी मौत हो गई। मां-बेटे की मौत से परिवार बिल्कुल टूट गया। गांव वालों के अनुसार किशोरी अपने बेटे से बहुत ज्यादा प्यार करती थीं और वह बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकीं। बेटे की मौत के बाद मां की मौत से घर में चीख-पुकार मच गई। परिवार के सदस्य और सभी रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में मातम छाया है।

5 साल पहले पिता की हुई थी मौत

परिजन का कहना है कि हरिप्रकाश अविवाहित थे। पिता मायाराम का निधन पांच साल पहले हुआ था। अब मां और बेटे के एक साथ चले जाने से बड़ा भाई हरिशंकर (42 वर्ष) और परिवार के बाकी सदस्य टूट गए हैं। अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। गांव वालों का यह भी कहना है कि अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी बड़े भाई हरिशंकर पर आ गई है। घर वालों को अब आर्थिक स्थिति की भी चिंता सता रही है। बच्चों की पढ़ाई को लेकर हरिशंकर चिंतित हो रहा है।

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