मां की गोद में तड़पता रहा बेटा, रिक्शा चालकों ने मदद से किया इनकार; अस्पताल पहुंचते ही मौत

Nashik News: नासिक में इंसानियत शर्मसार हो गई। सांस लेने में तकलीफ झेल रहे 9 साल के बच्चे को मां अस्पताल ले जाने की गुहार लगाती रही, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। मां की गोद में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।
नासिक 9 साल के बच्चे ने तोड़ा दम (pic credit; social media)
नासिक 9 साल के बच्चे ने तोड़ा दम (pic credit; social media)
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9 Year Old Boy Dies in Nashik: नासिक में एक दिल दहला देने वाली घटना ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। एक मां अपने 9 साल के बेटे को गोद में लेकर मदद की भीख मांगती रही, लेकिन किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया। जब तक मदद मिली, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मासूम ने अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ दिया।

सोमवार दोपहर मराठा कॉलोनी इलाके में 9 वर्षीय प्रवीण सुरेश डगले अपनी मां संगीता डगले के साथ रिश्तेदार के घर आया हुआ था। खाना खाते वक्त उसके गले में कुछ फंस गया। सांस लेने में तकलीफ होने लगी। घबराई मां बच्चे को लेकर पास के निजी डॉक्टर के पास भागीं। डॉक्टर ने बच्चे की हालत गंभीर देखकर तुरंत बिटको अस्पताल ले जाने को कहा।

मां संगीता डगले अपने बेटे को गोद में लिए सड़क पर भागती रहीं। रिक्शा चालकों से बार-बार विनती करती रहीं, “भैया, मेरे बच्चे को अस्पताल ले चलो...” लेकिन किसी ने भी मदद नहीं की। किसी ने कहा “रूट नहीं है”, तो किसी ने “समय नहीं” का बहाना बना लिया।

उसी दौरान वहां से गुजर रहे भूषण शहाणे, भाजपा नाशिक दक्षिण जिला उपाध्यक्ष, ने यह मंजर देखा। वे तुरंत अपनी बाइक रोककर मां-बेटे को बैठाया और अस्पताल की ओर दौड़े। पहले वे सिन्नर फाटा के सावित्रीबाई फुले अस्पताल पहुंचे, लेकिन गेट बंद मिला। फिर सीधे बिटको अस्पताल पहुंचे।

भूषण शहाणे ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर भी स्ट्रेचर देने में कर्मचारियों ने लापरवाही दिखाई। मैंने बच्चे को खुद उठाकर डॉक्टरों के पास पहुंचाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। बच्चे ने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया।

अस्पताल में बच्चे की मौत की खबर सुनते ही मां चीखने लगी। उनकी पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। लेकिन सवाल अब भी वही है क्या हमारी संवेदनाएं इतनी मर चुकी हैं कि मदद मांगती एक मां को भी अनसुना कर दिया जाए?

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