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अखिलेश की राह पर चल पड़ीं मायावती! 2027 चुनाव से पहले उठाया बड़ा मुद्दा, यूपी में मच गई सियासी हलचल

Mayawati on SIR: सपा मुखिया अखिलेश यादव के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इलेक्शन कमीशन से SIR की डेडलाइन बढ़ाने की रिक्वेस्ट की है। जिससे बीएलओ पर ज्यादा प्रेशर न पड़े और नाम न काटे जाएं।

  • Written By: अभिषेक सिंह
Updated On: Dec 09, 2025 | 07:03 PM

मायावती व अखिलेश यादव (डिजाइन फोटो)

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Mayawati News: सपा मुखिया अखिलेश यादव के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इलेक्शन कमीशन से SIR की डेडलाइन बढ़ाने की रिक्वेस्ट की है। इसके पीछे मायावती का तर्क है कि BLO बिना किसी प्रेशर के आराम से काम कर सकें और जल्दबाजी में किसी का नाम वोटर लिस्ट से बेवजह न काटा जाए।

उन्होंने कहा कि क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले कैंडिडेट को अपने रिकॉर्ड बताने की ज़िम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। छिपाने पर सज़ा मिलनी चाहिए। यह काम पार्टी पर नहीं डालना चाहिए। साथ ही चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से होने चाहिए, क्योंकि ईवीएम से होने वाले चुनावों में धांधली का डर बार-बार रहता है।

मायावती ने एक्स पर की लंबी-चौड़ी पोस्ट

मायावती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज से पार्लियामेंट में इलेक्शन रिफॉर्म पर चर्चा हो रही है, बसपा यह बताना चाहती है कि इलेक्शन प्रोसेस में दूसरे रिफॉर्म के साथ-साथ, नीचे दिए गए तीन खास रिफॉर्म बहुत ज़रूरी हैं। बसपा देश भर में अभी लागू SIR सिस्टम के खिलाफ नहीं है।”

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‘वोटर लिस्ट से काटे जा रहे लोगों के नाम’… UP की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जैसा कि विदित है कि आज से संसद में चूंकि चुनाव सुधार को लेकर चर्चा हो रही है। अतः बी.एस.पी. की ओर से इस सम्बन्ध में यह कहना है कि चुनाव की प्रक्रिया में अन्य सुधार लाने के साथ-साथ निम्न तीन ख़ास सुधार लाना बहुत ज़रूरी हैं।
SIR को लेकर जो पूरे देश में व्यवस्था चल रही है BSP उसके…
— Mayawati (@Mayawati) December 9, 2025

बसपा का कहना है कि वोटर लिस्ट भरने के प्रोसेस के लिए जो टाइम लिमिट तय की गई है, वह बहुत कम है, जिससे BLO पर बहुत ज़्यादा प्रेशर पड़ रहा है और कई लोगों की तो काम के बोझ की वजह से जान भी जा चुकी है। जहां लाखों वोटर हैं वहां BLO को पूरा टाइम दिया जाना चाहिए, खासकर ऐसे राज्य में जहां जल्द ही कोई चुनाव नहीं होने वाला है।

SIR डेडलाइन बढ़नी चाहिए: मायावती

मायावती ने आगे लिखा कि उत्तर प्रदेश में 154 मिलियन से ज़्यादा वोटर हैं और अगर SIR प्रोसेस में जल्दबाज़ी की गई, तो कई सही वोटर, खासकर जो गरीब हैं और काम के लिए बाहर गए हैं, लिस्ट से बाहर हो जाएंगे। इससे ऐसे लोग बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए वोट के संवैधानिक अधिकार से वंचित हो जाएंगे, जो पूरी तरह से गलत होगा। इसलिए SIR प्रोसेस को पूरा करने में जल्दबाज़ी करने के बजाय, सही टाइम दिया जाना चाहिए, यानी अभी की डेडलाइन बढ़ाई जानी चाहिए।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक चुनाव आयोग ने भी निर्देश जारी किए हैं। क्रिमिनल हिस्ट्री वाले लोगों को अपने एफिडेविट में अपनी क्रिमिनल हिस्ट्री की पूरी जानकारी देनी होगी और लोकल अखबारों में पूरी जानकारी पब्लिश करनी होगी। कैंडिडेट को रिप्रेजेंट करने वाली पॉलिटिकल पार्टी इस जानकारी को नेशनल अखबारों में पब्लिश करने के लिए भी ज़िम्मेदार होगी।

इलेक्शन कमीशन से की ये बड़ी डिमांड

इस बारे में बसपा का कहना है कि अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग जिन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट/सिंबल दिया जाता है, वे पार्टी को अपना क्रिमिनल हिस्ट्री नहीं बताते हैं और कुछ के मामले में पार्टी को स्क्रूटनी के दौरान ही पता चलता है, जिससे पार्टी की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है। इसके अलावा ऐसे कैंडिडेट का क्रिमिनल हिस्ट्री नेशनल अखबारों में पब्लिश करने की ज़िम्मेदारी पार्टी पर डाली गई है।

इस बारे में, हमारी पार्टी का सुझाव है कि क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले कैंडिडेट के बारे में सभी फॉर्मैलिटी पूरी करने की ज़िम्मेदारी उन पर होनी चाहिए। इसके अलावा अगर बाद में यह पता चलता है कि किसी कैंडिडेट ने अपना क्रिमिनल हिस्ट्री छिपाया है, तो इससे जुड़ी सभी कानूनी ज़िम्मेदारी उन पर आनी चाहिए पार्टी पर नहीं।

‘EVM की बजाय बैलट पेपर से हो चुनाव’

इसके अलावा हमारी पार्टी यह भी सुझाव देती है कि चुनाव के दौरान और बाद में ईवीएम में खराबी की लगातार आने वाली शिकायतों को दूर करने और चुनावी प्रोसेस में पूरा भरोसा जगाने के लिए अब ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से वोटिंग फिर से शुरू की जानी चाहिए। अगर किसी वजह से ऐसा नहीं हो सकता, तो कम से कम सभी बूथों पर वोट डालते समय VVPAT बॉक्स में गिरने वाली पर्चियों की गिनती होनी चाहिए और ईवीएम के वोटों से उनकी तुलना होनी चाहिए।

यह भी पढ़ें: उपचुनावों में ‘वोट डकैती’ हुई…लोकसभा में अखिलेश का धमाकेदार भाषण, बोले- SIR के नाम पर NRC चल रहा

इलेक्शन कमीशन का ऐसा न करने का कारण यह है कि इसमें बहुत ज़्यादा समय लगेगा, जो पूरी तरह से बेबुनियाद है। क्योंकि गिनती की प्रक्रिया में बस कुछ और घंटे जोड़ने से कोई फ़र्क नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि चुनाव की प्रक्रिया खुद महीनों तक चलती है। यह इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि इससे आम जनता का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ेगा और पैदा होने वाले ऐसे कई शक खत्म होंगे, जो देश के हित में होगा।

Mayawati demands extension of sir deadline after akhilesh election commission

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Published On: Dec 09, 2025 | 07:03 PM

Topics:  

  • Akhilesh Yadav
  • BSP
  • Election Commission
  • Mayawati
  • Samajwadi Party
  • SIR

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