

Saint Premanand Disciple Rasik Dulari Death Case: मथुरा वृंदावन की आध्यात्मिक नगरी में संत प्रेमामंद महाराज के करीब 25 वर्षीय साधु दीपक कुमार उर्फ रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामलें में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई चौकाने वाले खुलासे हुए है। मथुरा पोस्टमार्टम हाउस में 26 सितंबर 2026 को हुए पोस्टमार्टम में रसिक दुलारी के शरीर पर कई गंभीर बाहरी और अंदरूनी चोटें दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में मौत का कारण अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हेमरेजिक शॉक बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक उनको यह चोंटे उनकी मौत के पहले लगी थी।
दीपक कुमार उर्फ रसिक दुलारी शरण पुत्र छेटराम लोढ़ी गुरु कृपा कुंज, थाना वृंदावन, मथुरा में साधु के रूप में रह रहा था। उसकी उम्र करीब 25 वर्ष बताई गई है। मौत के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। रसिक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मामलें में कई सवाल खड़े कर दिए है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मृतक के सिर पर करीब 14 टांकों वाला घाव मिला। सिर के ऑक्सिपिटल क्षेत्र में हेमेटोमा यानी अंदरूनी रक्तस्राव पाया गया। खोपड़ी में हेयरलाइन फ्रैक्चर दर्ज किया गया है। मस्तिष्क में भी हेमेटोमा का उल्लेख है।
सिर्फ सिर ही नहीं, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोटों के निशान मिले हैं। बाएं निचले होंठ और ठुड्डी पर चोट दर्ज की गई। पैर के टखने में चोट के साथ अंदरूनी हड्डी में फ्रैक्चर भी पाया गया। ये सभी चिकित्सकीय निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज किए गए हैं।
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा छाती से जुड़ी चोटों को लेकर है। मृतक की बाईं ओर पांचवीं से आठवीं पसली तक फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है। यानी लगातार चार पसलियों में फ्रैक्चर दर्ज किया गया। इसके साथ ही बाएं फेफड़े के फटने का भी उल्लेख रिपोर्ट में है।
दोनों फेफड़ों में पीलापन पाया गया, जबकि फेफड़ों के आसपास की गुहा में रक्त मौजूद था। शरीर में हुए इसी तरह के अंदरूनी रक्तस्राव को देखते हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हेमरेजिक शॉक को मृत्यु का कारण बताया गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पेट की गुहा में करीब 100 मिलीलीटर पानी जैसे द्रव की मौजूदगी का भी उल्लेख है। लीवर पीला और पित्ताशय भरा हुआ पाया गया। हृदय के दोनों चैंबर खाली मिले। वहीं रीढ़ की हड्डी की जांच नहीं किए जाने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है।
रिपोर्ट में शरीर के एक हिस्से के अलग होने का भी उल्लेख किया गया है। शव की पहचान पुलिसकर्मी एचसी 632 जितेंद्र कुमार और मृतक के भाई मनीष पटेल ने की। पोस्टमार्टम के समय मृत्यु को करीब एक दिन बीतने का अनुमान लगाया गया था।
मथुरा पुलिस ने मामले से संबंधित जीडी संख्या 049, दिनांक 25 सितंबर 2026 दर्ज है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मौत के चिकित्सकीय कारण और शरीर पर मौजूद चोटों का विवरण तो सामने रख दिया है, लेकिन इन चोटों की परिस्थितियां अभी जांच का विषय हैं।
सिर में गंभीर चोट, खोपड़ी में फ्रैक्चर, चार पसलियों का टूटना और फेफड़े को क्षति जैसे निष्कर्षों के बाद अब पुलिस जांच में घटना से पहले और बाद के पूरे घटनाक्रम को जोड़ना महत्वपूर्ण होगा। मृतक आखिरी बार कहां था, उसके साथ कौन-कौन लोग मौजूद थे और उसे ये चोटें किन परिस्थितियों में लगीं-इन सवालों के जवाब जांच से ही सामने आ सकेंगे।
फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट को घटना की जांच में एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय दस्तावेज माना जा रहा है। रिपोर्ट मौत के कारण और चोटों की पुष्टि करती है, लेकिन इन चोटों को लेकर किसी व्यक्ति की भूमिका या घटना की प्रकृति का अंतिम निर्धारण जांच के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगा।