मेडिकल लापरवाही की शिकायतों के लिए बनेगी स्थायी व्यवस्था, हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को दिए निर्देश

Allahabad High Court: हाईकोर्ट ने चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायतों के निस्तारण के लिए यूपी सरकार को तीन सप्ताह में स्थायी SOP तैयार कर पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
Allahabad High Court Directs UP Government to Frame SOP for Medical Negligence Complaint
हाईकोर्ट(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Allahabad High Court Medical Negligence SOP: चिकित्सकीय लापरवाही के मामलों में पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने के लिए इधर-उधर भटकने से बचाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को स्थायी व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल नेग्लिजेंस की शिकायतों के निस्तारण के लिए स्पष्ट और प्रभावी प्रक्रिया का होना जरूरी है। इसके लिए सरकार को तीन सप्ताह के भीतर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर अदालत में पेश करने को कहा गया है।

अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। याचिका में चिकित्सा संबंधी लापरवाही की शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

पिछली सुनवाई के आदेश के अनुपालन में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष अदालत में उपस्थित हुए। वहीं, अपर महाधिवक्ता कार्तिकेय सरन ने प्रयागराज के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक सिंह का हलफनामा पेश किया।

Allahabad High Court Directs UP Government to Frame SOP for Medical Negligence Complaint
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कानून और गाइडलाइन का देना होगा ध्यान

सरकार की ओर से बताया गया कि चिकित्सकीय लापरवाही की जांच के लिए क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट-2010, उत्तर प्रदेश क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट नियम-2019 और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की गाइडलाइन को ध्यान में रखा गया है।

हालांकि, कोर्ट ने पाया कि ऐसी कोई स्पष्ट और स्थायी प्रक्रिया मौजूद नहीं है, जिसके तहत चिकित्सकीय लापरवाही से पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत लेकर किसी निर्धारित अधिकारी के पास पहुंच सके। अपर महाधिवक्ता ने भी स्वीकार किया कि इस संबंध में फिलहाल कोई बाध्यकारी व्यवस्था नहीं है।

नामित अधिकारी की व्यवस्था जरूरी

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी नामित अधिकारी की व्यवस्था नहीं होने के कारण पीड़ित को शिकायत के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और अंततः न्याय के लिए अदालत का रुख करना पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि सरकार स्थायी प्रक्रिया बनाकर इस समस्या को दूर कर सकती है। इससे जैकब मैथ्यू मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन भी सुनिश्चित हो सकेगा।

याचिकाकर्ताओं ने जांच समिति के निष्कर्षों को अस्पष्ट बताते हुए उन्हें चुनौती दी है। कोर्ट ने इस पर भी प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।

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