

Mathura Vrindavan News: नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक जल त्रासदी के बीच फंसे लोगों की सुरक्षा और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए वृंदावन में धार्मिक अनुष्ठान शुरू किया गया है। सनातन संस्कार धाम, आनंद वाटिका, वृंदावन में 26 अगस्त की दोपहर से अखंड शिवजी का अभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जा रहा है। इस विशेष अनुष्ठान में आचार्य रामविलास चतुर्वेदी के साथ 21 ब्राह्मण संकल्प लेकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में अचानक आई प्राकृतिक आपदा के कारण बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की खबरों के बीच वृंदावन के संतों और विप्र समाज ने पीड़ितों की कुशलता के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की है। इस त्रासदी में कई लोगों की जान जाने से व्यापक क्षति हुई है। वहीं, मानसरोवर की धार्मिक यात्रा पर गए अनेक तीर्थयात्रियों के भी प्रभावित क्षेत्रों में फंसे होने की चिंता जताई जा रही है।
अनुष्ठान में शामिल ब्राह्मणों ने भगवान महाकाल, पशुपतिनाथ, काशी विश्वनाथ और गोपेश्वर महादेव से प्रार्थना करते हुए कामना की कि आपदा में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। मलबे में दबे लोगों के सकुशल बचाव के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को इस कठिन समय में संबल मिलने की भी कामना की जा रही है।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान गंडकी नदी के किनारे बसे बिहार सहित आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रार्थना की जा रही है। विप्र समाज का कहना है कि प्राकृतिक आपदा किसी सीमा या क्षेत्र तक सीमित नहीं होती, इसलिए मानवता के नाते प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति की सुरक्षा के लिए सामूहिक रूप से प्रार्थना करना आवश्यक है।
आचार्य रामविलास चतुर्वेदी के नेतृत्व में 21 ब्राह्मण लगातार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए शिवजी का अभिषेक कर रहे हैं। मान्यता है कि महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव की आराधना का अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्र है और संकट के समय इसकी साधना कल्याण एवं शांति की भावना से की जाती है।
वृंदावन में चल रहे इस धार्मिक अनुष्ठान का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति या परिवार के लिए नहीं, बल्कि नेपाल की प्राकृतिक आपदा से प्रभावित सभी लोगों की कुशलता के लिए सामूहिक प्रार्थना करना है। अनुष्ठान में शामिल श्रद्धालुओं ने कामना की कि राहत और बचाव कार्यों में सफलता मिले, फंसे हुए तीर्थयात्री एवं स्थानीय लोग सुरक्षित अपने परिवारों तक पहुंचें तथा जिन लोगों ने इस त्रासदी में अपने प्राण गंवाए हैं, उनकी आत्माओं को शांति प्राप्त हो।
सनातन संस्कार धाम में हो रहा यह महामृत्युंजय अनुष्ठान आपदा की घड़ी में पीड़ितों के प्रति संवेदना, मानवता और आध्यात्मिक एकजुटता का संदेश दे रहा है।