कोयला संकट के बीच राहत की तैयारी; यूपी को केरल से मिलेगी 600 मेगावाट तक बिजली, गर्मियों में होगी पावर बैंकिंग

UP Electricity Problem: उप्र को अगले 5वर्षों तक गर्मियों में केरल से 600 MW बिजली पावर बैंकिंग के जरिए मिलने पर सहमति बनी है। बंद बिजली इकाइयों के दोबारा शुरू होने से 1250 मेगावाट मिलने की उम्मीद है।
UP to Receive 500 to 600 MW Power from Kerala During Summer Under Power Banking
बिजली समस्या खत्म(सांकेतिक फोटो)
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UP Kerala Power Banking 600 MW: मानसून के दौरान कोयला आपूर्ति में आयी कमी और कई ताप बिजलीघरों के बंद हो जाने के बीच उत्तर प्रदेश सरकार को अतिरिक्त बिजली मिलने का रास्ता साफ हुआ है। प्रदेश को आगले पांच सालों तक गरमी के महीनों में केरल से बिजली मिलेगी।

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अधिकारियों के साथ केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (केएसईबी) के डायरेक्टर ऑपरेशन शिव एस. दास एवं उनकी टीम के साथ हुई बैठक में अगले पांच वर्षों तक गर्मी के महीनों में पावर बैंकिंग के माध्यम से 500-600 मेगावाट बिजली प्राप्त करने पर सहमति बनी है। फिलहाल उत्तर प्रदेश को महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से पावर बैंकिंग के जरिए औसतन करीब 2400 मेगावाट बिजली पीक आवर्स में मिल रही है।

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने समीक्षा कर लिया फीडबैक

उत्तर प्रदेश में बारिश से कोयला आपूर्ति प्रभावित होने व कई बिजली घरों में इकाइयां बंद होने के बाद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अधिकारियों के साथ विद्युत आपूर्ति की समीक्षा कर फीडबैक लिया और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जाएं और जहां से भी बिजली उपलब्ध हो, उसका उपयोग कर आपूर्ति सामान्य रखी जाए।

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कारपोरेशन अधिकारियों ने बताया कि अनपरा-डी, हरदुआगंज-ई और ओबरा-बी की यूनिट-10 का पुनः संचालन शुरू होने से प्रदेश की विद्युत उपलब्धता में औसतन करीब 1300 मेगावाट की वृद्धि हुई है। अगले एक-दो दिनों में एपीजीसी, सिंगरौली की यूनिट-2, टीआरएन एनर्जी की यूनिट-1, घाटमपुर की यूनिट-1 तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयां उपलब्ध हो जाने से लगभग 1,250 मेगावाट की अतिरिक्त वृद्धि हो जाएगी।

कोयला की कमी के कारण हो रही समस्या

अधिकारियों के मुताबिक कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि और जलभराव के कारण थर्मल पावर प्लांटों को पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते सिंगरौली, रिहंद, खुर्जा, मेजा, लैंको, रोजा और बारा समेत कई परियोजनाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इससे प्रदेश को औसतन 1500 से 2000 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कॉरपोरेशन अध्यक्ष ने कहा कि इसके बावजूद योगी सरकार उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए प्रदेश में विद्युत आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने में जुटी है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में बीते तीन वर्षों में बिजली की मांग में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुयी है। गर्मियों में जहां मांग 35000 मेगावाट प्रतिदिन पहुंची है वहीं मानसून में भी औसत मांग 25000 मेगावाट से ज्यादा रही है।

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