

मौत पर परिजनों को 4 लाख की जगह 8 लाख रुपये की मदद
फसलों के नुकसान पर मुआवजा राशि में 25 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी
1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 तक हुए नुकसान की होगी भरपाई
नए मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक रहेंगे प्रभावी
Financial Aid Increase Disaster Death UP: उत्तर प्रदेश में आपदा प्रभावित लोगों को बड़ी राहत देते हुए आपदा राहत सहायता के मानकों में बदलाव किया है। प्राकृतिक आपदा में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर अब उसके परिजनों को 4 लाख रुपये की जगह 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही फसलों के नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे में भी 25 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी की गई है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
नए मानकों के तहत 1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 तक प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के तहत सहायता राशि के नए प्रावधान वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे।
आपदा में पशुओं की मौत होने पर मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी इजाफा किया गया है। बड़े पशुओं की मौत पर अब 40 हजार की जगह 50 हजार रुपये दिए जाएंगे। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं के लिए सहायता राशि 4 हजार से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है।
वहीं, घोड़े और खच्चर जैसे भार ढोने वाले पशुओं की मौत पर 20 हजार की जगह 25,400 रुपये मिलेंगे। मुर्गीपालकों को प्रति मुर्गी मिलने वाली सहायता राशि 100 से बढ़ाकर 130 रुपये कर दी गई है।
फसल क्षति के मुआवजे में भी सरकार ने बढ़ोतरी की है। सिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान पर अब 17 हजार की जगह 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे। बारिश वाली क्षेत्र में यह राशि 8,500 से बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। बारहमासी फसलों और कृषि वानिकी को हुए नुकसान पर सहायता राशि 22,500 से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है।
रेशम उत्पादन को हुए नुकसान पर भी राहत राशि बढ़ाई गई है। एरी, शहतूत और रेशम उत्पादन के लिए सहायता 6 हजार से बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। मूगा रेशम उत्पादन में नुकसान पर अब 7,500 की जगह 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे।
आपदा प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में सामान्य परिस्थितियों में 30 दिनों तक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। विशेष परिस्थितियों में इस अवधि को 60 दिन या जरूरत के अनुसार आगे बढ़ाया जा सकेगा।
पेयजल की व्यवस्था के लिए सामान्य परिस्थितियों में 30 दिनों तक और सूखे की स्थिति में 90 दिनों तक सहायता देने का प्रावधान किया गया है
आपदा में क्षतिग्रस्त मकानों और सार्वजनिक सुविधाओं की मरम्मत के लिए भी नए सहायता मानक तय किए गए हैं। मैदानी क्षेत्रों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकान के लिए 1.85 लाख रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 2.06 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। मैदानी क्षेत्रों में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान के लिए 93 हजार रुपये की मदद का प्रावधान है।
शैक्षणिक संस्थानों की मरम्मत के लिए प्राथमिक विद्यालयों को 15.50 लाख रुपये तक और माध्यमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेजों व पॉलिटेक्निक संस्थानों को 26 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत के लिए 43 लाख रुपये तक दिए जाएंगे।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 के बीच प्राकृतिक आपदाओं के कारण 10,02,684 किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा है। इस दौरान करीब 52 लाख 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है।
वहीं, प्राकृतिक आपदाओं में अब तक 3,537 पशुओं की मौत दर्ज की गई है। नुकसान की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों और परिवारों को नए मानकों के अनुसार बढ़ी हुई राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी।