देश के इस राज्य में दोगुना होगा रेशम उत्पादन, राज्य सरकार जल्द उतारेगी खुद का लेबल

पंजाब सरकार के बागबानी मंत्री चेतन सिंह जौरामाजरा ने राज्य में रेशम उत्पादन बढ़ाने के लिए खुद का लेबल लॉन्च करने की तैयारी कर ली है। सरकार अपने लेबल के तहत ही रेशम उत्पादों को भी लॉन्च करने वाली है। जिसके लिए प्रदेश की सरकार ने शनिवार को अपना 'लोगो' भी प्रस्तुत किया है।
Punjab Horticulture Minister Chetan Singh Joramajra Statement on silk production
पंजाब के बागवानी मंत्री चेतन सिंह जोरमाजरा (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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चंडीगढ़ : प्रदेश में रेशम उत्पाद बढ़ाने के लिए पंजाब सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। शनिवार को राज्य सरकार के बागबानी मंत्री चेतन सिंह जौरामाजरा ने जानकारी देते हुए बताया है कि प्रदेश की सरकार जल्द ही खुद के लेबल के अंडर राज्य में निर्मित रेशम उत्पादों को लॉन्च कर सकती है। राज्य स्तरीय रेशम दिवस समारोह के दौरान जौरामाजरा ने रेशम उत्पादों के लिए बनाए गए विभाग के 'लोगो का भी विमोचन किया है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि साल 2025 के आखिर तक राज्य के रेशम उत्पादन को दोगुना करने के लिए योजना बनायी जाएगी।

जौरामाजरा ने कहा कि मौजूदा समय में गुरदासपुर, होशियारपुर, पठानकोट और रूपनगर के उप-पहाड़ी जिलों के लगभग 230 गांवों में रेशम उत्पादन किया जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य मुख्य रूप से दो प्रकार के रेशम का उत्पादन करता है- बाइवोल्टाइन शहतूत और एरी रेशम। मंत्री ने कहा, ‘‘यह व्यवसाय मुख्य रूप से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों, भूमिहीन व्यक्तियों या छोटी जोत वाले लोगों द्वारा किया जाता है।''

उत्पाद के लिए अधिक मूल्य

उन्होंने कहा कि वर्तमान में, एक रेशम किसान की वार्षिक आय 40,000 से 50,000 रुपये है, जिसे अपर्याप्त माना जाता है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए रेशम उत्पादों के उचित मूल्य के मामले को उठाते हुए, जौरामजरा ने कहा कि सरकार कोकून को संसाधित करने के लिए अपनी रीलिंग इकाइयाँ स्थापित करेगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि रेशम किसानों को उनके उत्पाद के लिए अधिक मूल्य मिले।

महत्वपूर्ण कदम

पठानकोट में कोकून को रेशम धागे में बदलने के लिए एक रीलिंग इकाई स्थापित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस इकाई के चालू होने से आय में 1.5 से 2 गुना वृद्धि हो सकती है। उन्होंने उत्पादन लागत को कम करने और किसानों को सस्ती दरों पर बीज उपलब्ध कराने के लिए डलहौजी (हिमाचल प्रदेश) में राज्य के एकमात्र रेशम बीज उत्पादन केंद्र को फिर से सक्रिय करने के महत्वपूर्ण कदम का भी उल्लेख किया।

कोकून विपणन के लिए सहायता

विशेष मुख्य सचिव (बागवानी) के ए पी सिन्हा ने कहा कि राज्य में 13 सरकारी रेशम उत्पादन फार्म हैं और इन फार्मों में स्थापित बुनियादी ढांचे के साथ, विभाग का तकनीकी स्टाफ रेशम किसानों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान कर रहा है। इन सुविधाओं में वृक्षारोपण सहायता, रेशमकीट के अंडों का वितरण, युवा रेशमकीटों का पालन और कोकून विपणन के लिए सहायता आदि शामिल है।

( एजेंसी इनपुट के साथ )