

पुलिसकर्मियों को राहत देते हुए सीएम योगी ने की तीन अहम घोषणाएं
सीएम योगी ने शहीद पुलिसकर्मियों को दी श्रद्धांजलि
कानून-व्यवस्था को लेकर पिछली सरकारों पर साधा निशाना
Police Commemoration Day 2026: पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के साथ प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस के कामकाज में आए बदलावों को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा। रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में 12 टोलियों की परेड, पुष्पचक्र अर्पण और दो मिनट के मौन के बाद सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि ऐसा सतत दायित्व है, जिसके लिए अपना सुख, सपने और कभी-कभी जीवन तक समर्पित करना पड़ता है। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों के मोटरसाइकिल, मोबाइल और वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले के दौर में अपराधियों पर कार्रवाई करने से पुलिस अधिकारी भी हिचकते थे। अपराधियों के खिलाफ कदम उठाने पर सत्ता के गलियारों से फोन आने लगते थे और कार्रवाई अपराधी के बजाय अधिकारी पर हो जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय अपराधी खुलेआम असलहे लहराते थे, जबकि पुलिसकर्मी संसाधनों की कमी के बीच काम करने को मजबूर थे। योगी ने कहा कि आज प्रदेश में अपराधियों को कानून के शिकंजे का एहसास है। उन्होंने आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि एटीएस ने देवबंद से लेकर सीमावर्ती जिलों तक कमांड सेंटर स्थापित कर स्लीपर सेल और घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है।
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों को राहत देते हुए तीन अहम घोषणाएं कीं। फील्ड ड्यूटी में तैनात सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर का मोटरसाइकिल भत्ता 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
पीपीएस अधिकारियों का यूनिफॉर्म भत्ता 6,400 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया है। वहीं, कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल का मोबाइल भत्ता 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
पुलिस स्मृति दिवस की घटना साल 1959 से जुड़ी है। उस समय लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स इलाके में भारतीय पुलिसकर्मी सीमा पर निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान 21 अक्टूबर को चीनी सैनिकों ने पुलिसकर्मियों की एक टीम पर हमला कर दिया। इस हमले में 10 भारतीय पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।
इन जवानों ने देश की सुरक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्हीं की याद में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।
अक्टूबर 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में भारतीय पुलिस की टीमें गश्त कर रही थीं। 20 अक्टूबर को गश्त के लिए निकली तीन टीमों में से दो वापस लौट आईं, लेकिन तीसरी टीम के दो पुलिसकर्मी और एक पोर्टर वापस नहीं आए।
इसके बाद लापता साथियों की तलाश के लिए पुलिसकर्मियों की एक टीम भेजी गई। 21 अक्टूबर को करम सिंह के नेतृत्व में करीब 20 पुलिसकर्मी अपने साथियों की तलाश में आगे बढ़े। इसी दौरान चीनी सैनिकों ने उन पर हमला कर दिया। गोलीबारी में 10 पुलिसकर्मी शहीद हो गए, जबकि सात को बंदी बना लिया गया। बाकी पुलिसकर्मी वहां से निकलने में सफल रहे।
लद्दाख में शहीद हुए पुलिसकर्मियों की याद में जनवरी 1960 में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों के सम्मेलन में 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाने का फैसला लिया गया। इसके बाद हर साल इस दिन शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
21 अक्टूबर, 1959 को शहीद हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 10 वीर जवानों जिन्होंने भारत की उत्तरी सीमा की रक्षा करते हुए प्राण न्यौछावर कर दिए जिसमें ईमान सिंह, पूरन सिंह, नुरबू लामा, बेगराज, माखनलाल, शिवनाथ, मनजीत सुबा, धरम सिंह, श्रवण दास और शोरिंग नुरबू शामिल है। इन जवानों ने भारत की उत्तरी सीमा की रक्षा करते हुए अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया।
1 सितंबर, 2025 से 31 अगस्त, 2026 तक की अवधि में पूरे भारत में 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्यपालन के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया। इनमें उत्तर प्रदेश पुलिस के छह वीर जवान भी शामिल हैं। शहीद होने वाले इन जवानों में उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, आरक्षी अशोक कुमार, आरक्षी प्रदीप कुमार, फायर सर्विस चालक तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित कुमार यादव के नाम शामिल हैं।
पुलिसकर्मियों के बलिदान और देश की सुरक्षा में उनकी भूमिका को सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर 2018 को नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक देश को समर्पित किया था।
रिपोर्ट: इशांक दीक्षित