

Highlights:
लखनऊ में अवैध चैंबरों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
बुलडोजर के सामने लेटकर प्रदर्शन कर रहे वकील
हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने शुरू की कार्रवाई
कैसरबाग कचहरी के आसपास चिह्नित किए गए थे 240 से अधिक चैंबर
Lucknow Lawyers Chamber Demolition: लखनऊ में हाई कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने अवैध वकील चैंबरों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस कार्रवाई के तहत करीब 240 चैंबरों को तोड़ा जाना है। इससे पहले चिह्नित चैंबरों पर लाल निशान लगाकर नंबर दर्ज किए गए थे और संबंधित लोगों को नोटिस भी जारी किए गए थे। रविवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर से चैंबरों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जा रही है। इस दौरान कुछ वकील बुलडोजर के सामने लेटकर विरोध जता रहे हैं। अधिवक्ताओं की मांग है कि चैंबर तोड़ने से पहले उनके बैठने और प्रैक्टिस करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
एडवोकेट संजीव लोधी ने बताया कि यहां करीब 240 चैंबर हैं, जिन्हें तोड़ा जा रहा है। ऐसे में अधिवक्ता अपनी प्रैक्टिस कहां करेंगे? उन्होंने शासन-प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि यह वकीलों को दिवाली का तोहफा दिया गया है। उनका कहना है कि चैंबर टूटने के बाद अधिवक्ताओं के सामने बैठने और न्यायिक कार्य करने की समस्या खड़ी हो जाएगी।
एडवोकेट श्रेया ने कहा कि अगर वकीलों के चैंबर अवैध हैं, तो उन पर कार्रवाई होना समझ में आता है, लेकिन इसी परिसर में मंदिर के सामने संचालित शराब के ठेके पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? उन्होंने कहा कि वकीलों के बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना उनके चैंबर तोड़े जा रहे हैं। उनकी मांग है कि यदि वकीलों के चैंबरों को हटाया जा रहा है, तो परिसर में स्थित शराब के ठेके को भी हटाया जाना चाहिए।
एडवोकेट श्रीकांत पांडे ने बताया कि यहां करीब 300 चैंबर हैं, जहां बैठकर अधिवक्ता न्यायालय से जुड़े अपने कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि चैंबरों को तोड़े जाने से अधिवक्ताओं के सामने कामकाज करने और बैठने की समस्या पैदा होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन चैंबरों को हटाया जा रहा है, तो अधिवक्ता कहां बैठकर अपना काम करेंगे? उनकी मांग है कि सरकार अधिवक्ताओं के लिए बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था करे, ताकि वे अपना न्यायिक कार्य जारी रख सकें।
करीब एक साल पहले हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका के तहत नगर निगम ने कैसरबाग क्षेत्र में अवैध चैंबरों का सर्वे कराया था। इसमें पुराने हाईकोर्ट परिसर, जिला सत्र न्यायालय, निबंधन कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय के सामने व पीछे की सड़कों के आसपास बने चैंबरों को चिह्नित किया गया था। शुरुआती सर्वे में करीब 240 चैंबर सामने आए थे।
मई से अगस्त के बीच नगर निगम ने दो चरणों में 72 चैंबरों को ध्वस्त किया था। हालांकि, इनमें से कुछ चैंबर दोबारा बनाए जाने की बात भी सामने आई थी। पिछली कार्रवाई के दौरान यह मुद्दा उठा था कि नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने केवल उन्हीं चैंबरों को हटाया, जिनका मामला अदालत तक पहुंचा था। इसके बाद शेष अवैध निर्माणों को हटाने का मामला फिर से चर्चा में आया।
शेष चैंबरों को हटाने के लिए पहले 11 अक्टूबर को अभियान चलाने की तैयारी थी, लेकिन आपत्तियों के निस्तारण और अदालत में अपील लंबित होने के कारण इसे टाल दिया गया। अब हाईकोर्ट की ओर से अपील खारिज किए जाने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई की तैयारी की है।
इन चैंबरों में लंबे समय से प्रैक्टिस कर रहे वकीलों का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 साल से यहां बैठकर काम कर रहे हैं। ऐसे में चैंबर हटने से उनके कामकाज पर असर पड़ सकता है। वकीलों का तर्क है कि यदि चैंबर अवैध हैं और उन्हें हटाया जाना है तो प्रशासन को उनके बैठने और काम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी चाहिए।
नगर निगम के अनुसार, कचहरी के आसपास सार्वजनिक रास्तों, नालों, नालियों और फुटपाथ पर बने अवैध निर्माणों को हटाना हाईकोर्ट के आदेश का हिस्सा है। इस कार्रवाई में पुलिस का सहयोग भी लिया जाएगा। अब शेष चैंबरों को हटाने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
रिपोर्ट- ईशांक दीक्षित