‘गौ गर्जना अक्षौहिणी संकल्प’ में बड़ा बदलाव: अब लखनऊ नहीं, अपनी-अपनी विधानसभा में जुटेंगे लाखों गौभक्त
Cow Protection Rally: लखनऊ में प्रस्तावित 'गौ गर्जना अक्षौहिणी संकल्प' कार्यक्रम का स्वरूप में बदलाव करते हुए आयोजन समिति ने गौभक्तों से अपनी-अपनी विधानसभा में कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की है।
- Written By: स्निग्धा श्रीवास्तव
शंकराचार्य (सोर्स- फोटो नवभारत
Lucknow Cow Protection Rally: 24 जुलाई 2026 को लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित होने वाले विशाल ‘गौ गर्जना अक्षौहिणी संकल्प’ कार्यक्रम के स्वरूप में प्रशासन के ढुलमुल और असहयोगात्मक रवैये के कारण एक बड़ा परिवर्तन किया गया है। अब देश भर से आने वाले लाखों गौभक्त लखनऊ आने के बजाय अपनी-अपनी विधानसभाओं में ही तय तिथि और समय पर इस ऐतिहासिक संकल्प का हिस्सा बनेंगे।
11 मार्च को हुई थी विशाल आयोजन की घोषणा
आयोजन समिति ने बताया गया कि बीते 11 मार्च को इसी मैदान पर आयोजित ‘शंखनाद सभा’ में ही 24 जुलाई को पुनः जुटने की घोषणा की थी। इसके लिए आयोजन समिति ने समय रहते कांशीराम स्मृति उपवन की कमेटी को लिखित आवेदन भी दिया था। स्थल प्रबंधन ने पत्र जारी किए जाने के बाद 25 जून 2026 को ₹4,64,640/- (चार लाख चौंसठ हजार छह सौ चालीस रुपये) का पूर्ण स्वीकृति शुल्क भी जमा कर दिया था।
प्रशासन पर असमंजस पैदा करने का आरोप
शुल्क जमा होने के बाद तीन जुलाई 2026 को कार्यक्रम की अनुमति के लिए प्रशासन को विधिवत आवेदन दिया गया था। इसके बाद आयोजन समिति के पर्यवेक्षक लगातार प्रतिदिन संबंधित कार्यालयों के चक्कर काटते रहे। इससे पहले 11 मार्च के कार्यक्रम में भी प्रशासन ने अंतिम 18 घंटे पहले 36 कठिन शर्तों के साथ अनुमति दी थी, जिससे भारी अव्यवस्था और भ्रम की स्थिति पैदा हुई थी और मीडिया में परमिशन न मिलने की खबरों के कारण असंख्य गौभक्त आने से वंचित रह गए थे।
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इसी कारण और वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए आयोजन समिति ने दिनांक 13 जुलाई को प्रशासन को तीन दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया था। इस गंभीर समस्या को 14 जुलाई 2026 को लखनऊ प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता के माध्यम से सार्वजनिक भी किया गया था। इसके बावजूद 22 जुलाई तक अतिरिक्त समय बीतने के बाद भी प्रशासन ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
अंतिम समय में लिया गया बड़ा निर्णय
जब प्रशासन द्वारा अनुमति देने या न देने की कोई स्थिति स्पष्ट नही की और अनगिनत गौभक्त लखनऊ पहुंचने की घोषणा कर चुके थे लाखों लोगों ने ट्रेन, फ्लाइट और गाड़ियां बुक की थीं वे सभी गहरे संशय में थे, लाइट, माइक, टेंट और भोजन जैसी लाखों लोगों की व्यवस्थाएं भी अनिश्चय की भेंट चढ़ चुकी हैं।
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तब असमंजस कि स्थिति में परमाराध्य शंकराचार्य ने गोरखपुर में 20 जुलाई को घोषित किया कि अब हम गौभक्तों को सरकार के षड़यंत्र का शिकार नहीं बनने देंगे और उत्तर प्रदेश का शासन और लखनऊ का प्रशासन गौमाता के प्राण और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए होने वाले इस पवित्र आंदोलन को रोकना चाहता है या अंतिम समय तक संशय बनाए रखकर इसे विफल करना चाहता है।
अब ऐसे होगा ‘गौ गर्जना अक्षौहिणी संकल्प’ का आयोजन
- लखनऊ न आएं गौभक्त: देश भर के गौभक्त अब लखनऊ आने का कष्ट न करें।
- स्थानीय स्तर पर आयोजन: सभी गौभक्त 24 जुलाई को दोपहर ठीक 12:00 बजे अपनी-अपनी विधानसभाओं में एकत्रित होकर ‘गौ गर्जना अक्षौहिणी संकल्प’ कार्यक्रम संपन्न करें।
- कार्यक्रम की रूपरेखा: कार्यक्रम की शुरुआत गौमाता के चित्र या मूर्ति की पूजा रूपी मंगलाचरण से होगी, इसके बाद क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्तियों के गौमाता के संदर्भ में व्याख्यान कराए जाएं।
- लाइव प्रवचन व संकल्प: इसके बाद LED स्क्रीन या टेलीविजन के माध्यम से दोपहर ठीक 01:00 बजे से 02:00 बजे के बीच परमाराध्य श्री के मुख्य प्रवचन को सभी लोग एक साथ सुनेंगे और उसके बाद गौमाता के लिए संकल्पबद्ध होकर ‘गौमाता की जय’ के नारों के साथ कार्यक्रम का समापन करेंगे।
- प्रशासनिक दमन का विरोध: समिति ने यह भी उजागर किया कि इससे पूर्व ‘गविष्ठी यात्रा’ के समय भी शासन-प्रशासन द्वारा अधिकांश स्थानों पर आयोजकों को नोटिस देकर या धमकियां देकर कार्यक्रम न करने का अनधिकृत दबाव बनाया गया था।
मीडिया को किया गया आमंत्रित
बता दें कि आयोजन समिति ने देश भर के सभी प्रभारियों और गौभक्तों से अपील की है कि वे स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में स्थानीय पत्रकारों और मीडिया को भी सादर आमंत्रित करें, ताकि गौमाता की आवाज और वहां दिए गए वक्तव्यों को मीडिया के माध्यम से पुरजोर तरीके से सार्वजनिक किया जा सके।
आयोजक समिति ने बताया कि कार्यक्रम के 36 घंटे पहले लखनऊ प्रशासन ने 22 जुलाई की शाम को अनुमति पत्र पोर्टल पर अपलोड किया है। साथ ही साथ दो दिनों से जगह जगह आयोजक एवं प्रतिनिधियों को हाउस अरेस्ट भी किया गया है। शासन व प्रशासन के इस अमानवीय गौ विरोधी कार्य की कड़ी निंदा करते है।
