

साढ़े नौ साल में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
अकेले पुलिस में 2.30 लाख भर्तियां
छह माह में एक लाख नियुक्तियों का संकल्प पूरा करने की दिशा में बढ़ी सरकार
CM Yogi Interacts With New Sub-Inspectors: राजनीतिक मंचों पर विपक्ष पर तीखे हमले करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में नवनियुक्त दरोगाओं को नियुक्ति पत्र सौंपते समय एक अलग अंदाज में नजर आए। यहां उनका अभिभावक वाला रूप देखने को मिला। इस दौरान सीएम योगी ने नवचयनित अभ्यर्थियों से सीधे संवाद किया और उनसे तीन सवाल भी पूछे।
सीएम ने पूछा कि क्या आपमें से किसी को चयन के लिए किसी की सिफारिश कराने की नौबत आई? क्या किसी ने आपसे किसी प्रकार का लेन-देन किया या धनराशि का प्रस्ताव रखा? क्या किसी ने धौंस दिखाकर नियुक्ति पत्र प्राप्त करने का प्रयास किया, जिसकी आज उत्तर प्रदेश में कल्पना भी नहीं की जा सकती।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस बल में निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित 4,543 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।
इस अवसर पर उन्होंने दो टूक कहा कि उत्तर प्रदेश में अब भाई-भतीजावाद नहीं चलेगा। प्रदेश की 25 करोड़ जनता ही हमारा परिवार है और सरकार सभी के साथ समान व्यवहार करेगी। नियुक्ति की प्रक्रिया में किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। योग्यता और मेरिट के आधार पर प्रदेश के हर युवा को अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में भर्ती की स्थिति ऐसी थी कि आवेदन कोई करता था, परीक्षा कोई दूसरा देता था और नियुक्ति पत्र किसी तीसरे को मिल जाता था। भर्ती के नाम पर सैफई सिंडिकेट का बोलबाला था। हमारी सरकार ने उस व्यवस्था को समाप्त कर पारदर्शी चयन प्रक्रिया स्थापित की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन सरकार नहीं आई होती, तो पारदर्शी और ईमानदार भर्ती प्रक्रिया संपन्न होना एक दिवास्वप्न जैसा होता। वर्ष 2003 से 2017 के बीच ऐसी अनेक नियुक्तियां हुईं, जिनमें आवेदन किसी ने किया, परीक्षा किसी और ने दी और नौकरी किसी तीसरे व्यक्ति को मिल गई।
ऐसे कई मामले आज भी न्यायालयों में लंबित हैं। चिंता यह है कि वर्षों बाद यदि न्यायालय ऐसे मामलों में नियुक्तियां समाप्त करने का आदेश देता है तो उन युवाओं का क्या होगा, जिन्होंने इतने वर्षों तक सेवा की है? जिन बेईमान लोगों ने तब नौजवानों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया, उनकी पूरी संपत्ति जब्त होनी चाहिए।
हमने 2017 में ही तय किया था कि चयन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और किसी प्रकार का भाई-भतीजावाद या भेदभाव नहीं होगा। प्रदेश के 25 करोड़ नागरिक ही हमारा परिवार हैं। आज अंबेडकरनगर, गाजीपुर, संत कबीर नगर, देवरिया, भदोही, सोनभद्र, चित्रकूट, जालौन, सहारनपुर और हमीरपुर के युवाओं को भी समान अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र देना सरकार की अनुकंपा या कृपा नहीं है, बल्कि यह सरकार का कर्तव्य है। नौ-दस वर्ष पहले उत्तर प्रदेश अपनी पहचान खो चुका था। प्रदेश के नाम से लोग घबराते थे। बाहर के राज्यों में मेहनत और प्रतिभा के बल पर नौकरी पाने वाले उत्तर प्रदेश के युवाओं को किराये पर कमरा लेने तक में परेशानी होती थी।
प्रदेश में कर्फ्यू, दंगे और अराजकता आम बात थी। देश की सबसे बड़ी आबादी, सबसे बड़ा युवा कार्यबल, उपजाऊ भूमि और प्रचुर प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर था। प्रदेश देश के पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्था वाले राज्यों में शामिल था।
2017 में सरकार बनने पर कर्मचारियों को वेतन देने तक के लिए संसाधनों की कमी थी। उस समय कर्मचारियों की संख्या आज की तुलना में लगभग आधी थी, फिर भी वेतन देने में कठिनाई होती थी। आज सरकार के पास इतनी क्षमता है कि आवश्यकता पड़ने पर एक वर्ष तक कर्मचारियों को बैठाकर भी वेतन दिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने पुलिस सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2017 में उन्होंने पुलिस लाइन का निरीक्षण किया था। वहां एक जर्जर बैरक में दो पुलिसकर्मी आराम कर रहे थे। उनकी चारपाई टूटी हुई थी और छत की हालत ऐसी थी कि दिन में भी आसमान दिखाई देता था।
उसी समय तय किया गया कि पुलिसकर्मियों की आवासीय और अवस्थापना सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। आज प्रदेश के 56 जिलों में पुलिसकर्मियों के लिए आधुनिक बहुमंजिला आवासीय भवन बने हैं। पहले पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता लगभग छह हजार थी, जिसे बढ़ाकर अब एक साथ 60 हजार तक पहुंचाया गया है। प्रदेश में यूपी स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स और आपदा प्रबंधन के लिए यूपी एसडीआरएफ का गठन किया गया।
पिछली सरकारों के समय समाप्त की गई पीएसी की 54 कंपनियों को फिर से पुनर्गठित कर मजबूत किया गया। पहले केवल दो साइबर थाने थे, अब हर जिले में एक साइबर थाना और प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क है। सात जनपदों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है।
सीएम ने कहा कि नवचयनित उपनिरीक्षकों को परंपरागत पुलिस प्रशिक्षण के साथ तीन नए आपराधिक कानूनों, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रशिक्षण केंद्र तैयार किए गए हैं। प्रशिक्षण के बाद जिस भी विंग में तैनाती मिले, वहां नई पहचान बनाएं और पुलिस को आमजन के विश्वास का प्रतीक बनाएं। जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी पूंजी है। पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने इसी भावना के साथ काम किया है और अब नवचयनित उपनिरीक्षकों को इसी विरासत को आगे बढ़ाना है।
कार्यक्रम में वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायकगण राजेश्वर सिंह, डॉ. नीरज बोरा, ओम प्रकाश श्रीवास्तव, अम्बरीश कुमार, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण और अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अमिताभ यश उपस्थित रहे।