

मर्डर मिस्ट्री बना उमा कुशवाहा हत्याकांड
घटना के खुलासे के लिए 8 से ज्यादा टीमें लगाईं
अब पुलिस कर रही पति और बेटे के नार्को टेस्ट की तैयारी
Uma Kushwaha Murder Case: कानपुर में हुए उमा कुशवाहा हत्याकांड का खुलासा अब पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। घटना के 50 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। हालांकि पुलिस ने खुलासे के कई प्रयास किए, कई टीम लगाई गई लेकिन कानपुर कमिश्नरेट की हाईटेक पुलिस उमा कुशवाहा हत्याकांड के आरोपी तक ही नहीं पहुंच सकी।
कानपुर कमिश्नरेट के पश्चिमी जोन के रावतपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत हसनपुर के जे सेक्टर में रहने वाली उमा कुशवाहा की हत्या 1 सितंबर को कर दी गई थी। उमा की किराएदार जब उमा के कमरे में पहुंची तो हत्या की जानकारी हुई। इसके बाद से पुलिस लगातार टीम गठित कर उमा कुशवाहा हत्याकांड का खुलासा करने का प्रयास कर रही है। पुलिस की जांच शुरू होती है और खत्म भी हो जाती है लेकिन पुलिस असली हत्यारोपी तक नहीं पहुंच पाती। इसके बाद फिर से नए सिरे से जांच शुरू करने का दावा पुलिस करने लगती है।
1 सितंबर को हुए इस हत्याकांड में उमा कुशवाहा को बड़े ही शातिर अंदाज से गला घोंटकर हत्या करने के बाद कुर्सी पर इस कदर बैठा दिया गया था कि मानो उमा कुशवाहा बैठकर टीवी देख रही हो। इसके बाद 22 लाख रुपए के जेवर लूट कर आरोपी फरार हो गया था। पुलिस ने घटना के खुलासे के लिए 8 से ज्यादा टीमें लगाईं, 500 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए लेकिन हत्यारोपी तक पुलिस फिर भी नहीं पहुंच सकी। अब इस हत्याकांड का खुलासा पुलिस के लिए चुनौती बनता जा रहा है। साथ ही पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में लाकर खड़ा कर रहा है।
हत्यारोपी इतना शातिर है कि कानपुर कमिश्नरेट की हाईटेक पुलिस उस तक पहुंच ही नहीं पा रही है। पुलिस की जांच के रास्ते शुरू तो होते हैं लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंचते और बीच में ही रास्ता बंद हो जाता है। जांच कर रही पुलिस टीम जब सीसीटीवी फुटेज की जांच करती है तो उसका शक घर के ही किसी व्यक्ति पर जाता है। डीसीपी पश्चिम कासिम आबिदी ने बताया कि उमा के पति और बेटे पर पुलिस को शक है लेकिन दोनों के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य पुलिस को हासिल नहीं हो पा रहे। इसके लिए पुलिस ने नार्को टेस्ट कराने की तैयारी शुरू की है और न्यायालय में अनुमति के लिए भेज भी दिया गया है।
सवाल फिर भी वही है आखिर कानपुर पुलिस उमा कुशवाहा हत्याकांड के 50 दिन बीत जाने के बाद भी खुलासा क्यों नहीं कर पा रही। नार्को टेस्ट की तैयारी तो शुरू की लेकिन क्या टेस्ट करा पाना पुलिस के लिए संभव होगा क्योंकि नार्को टेस्ट कराने के लिए जिस व्यक्ति का नार्को टेस्ट किया जाना है उसकी सहमति अनिवार्य होती है। यदि उसकी सहमति के बिना नार्को टेस्ट कराया गया तो वह पूर्ण रूप से अवैध माना जाएगा। ऐसे में आखिर पुलिस उमा कुशवाहा हत्याकांड के आरोपी तक कैसे पहुंचेगी?