

Kakadev Murder Accused News: कानपुर के काकादेव थाना क्षेत्र के ओम चौराहे पर कारोबारी अमित कुमार गुप्ता की हत्या के 7 दिन बाद भी नामजाद आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं । इसी बीच हिस्ट्रीशीटर संजय ढाबा, हितेंद्र श्रीवास्तव उर्फ मोनू नेता, कुशल श्रीवास्तव ने अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित कर हत्याकांड में अपनी भूमिका से इनकार किया।
तीनों ने दावा किया कि उन्होंने अमित को नहीं पीटा और पब्लिक के दौड़ाने पर वे मौके से भागे थे। 5 सितंबर की देर रात ओम चौराहे पर सड़क किनारे पेशाब करने से रोकने को लेकर अमित का कार सवार युवकों से विवाद हुआ था।
आरोप है कि युवकों ने ईंट से उनके सर पर हमला कर दिया। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती अमित की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। वारदात के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने शास्त्री नगर निवासी हितेंद्र श्रीवास्तव उर्फ मोनू नेता, विजय नगर निवासी कुशल श्रीवास्तव, आवास विकास तीन निवासी संजय ढाबा और अश्विनी यादव की पहचान की थी।
स्थानीय लोगों का दावा है कि फुटेज में मोनू नेता अमित को थप्पड़ मारता दिखाई दे रहा है। वही हत्यारोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है और सोशल मीडिया पर एक्टिव भी हैं। अपना वीडियो वायरल कर रहे हैं।
ऐसे में कानपुर कमिश्नरेट की सेंट्रल जोन की पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने कानपुर कमिश्नरेट पुलिस के उसे दावे को भी सवालों के घेरे में ला दिया है जिसमें अपर पुलिस आयुक्त विपिन टाडा के आदेश पर देर रात खुलने वाली दुकानों पर पाबंदी लगाते हुए उन्हें जल्द बंद करने का निर्देश जारी किया गया था और जिन पुलिस कर्मियों के क्षेत्र में ऐसी दुकान खुली पाई जानी थी उन पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया था लेकिन यह दावे सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह गए।
कारोबारी की हत्या के आरोपियों ने अपने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर पुलिस को पुलिस को चुनौती दे दी है लेकिन इन सबमे पुलिस भी कहीं न कहीं बैकफुट पर दिखाई दे रही है क्योंकि जिस तरह से कानपुर कमिश्नरेट की सेंट्रल जोन की पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच पा रही वही ये आरोपी लगातार सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं फिर भी हैरान करने वाली बात यह है कि सेंट्रल जोन की सर्विलांस टीम की पकड़ से यह दूर कैसे रह गए हैं।
जिन आरोपियों ने अपने वीडियो वायरल किए हैं यह तीनों शातिर अपराधी हैं जिनके विरुद्ध पूर्व में भी कई मुकदमे दर्ज हैं और थाने से हिस्ट्रीशीटर भी हैं।
कानपुर कमिश्नरेट के अपर पुलिस आयुक्त विपिन टाडा ने अपने द्वारा जारी किए गए आदेश में यह सख्त निर्देश दिए थे कि जिन दुकानों पर संदिग्ध लोग ,अराजकतत्व इकट्ठा होते हैं ऐसी दुकान निर्धारित समय पर बंद कर दी जाए और अगर ऐसा नहीं होता है तो जिस क्षेत्र में यह दुकान खुलेंगी इसका दोषी उस क्षेत्र का पुलिसकर्मी होगा। सभी राजपत्रित अधिकारियों के नेतृत्व में यह कार्रवाई सुनिश्चित करनी थी लेकिन काकादेव थाना क्षेत्र में हुई घटना के बाद ये आदेश भी हवा हवाई साबित होता दिखा।
क्योंकि जिस तरह से हिस्ट्रीशीटर का चौराहे पर जमावड़ा देखा गया कारोबारी की हत्या भी हो गई लेकिन ना तो वहां पर पुलिस की गश्त देखी गई ना ही वहां दुकान बंद कराई गई थी और ना ही सुनसान इलाकों में शराब पीने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई थी।