कानपुर में शक्ति संवाद और कन्या जन्मोत्सव: महिलाओं ने साझा किए सफलता के अनुभव, 16 लाभार्थियों को मिली बेबी किट

Kanpur Shakti Samvad: राज्य महिला आयोग ने शक्ति संवाद एवं कन्या जन्मोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की सफलता की कहानियां साझा कीं और 16 बेबी किट वितरित की।
Kanpur Shakti Samvad Self Help Group Women Share Inspiring Stories of Financial Empowerment
शक्ति संवाद और कन्या जन्मोत्सव(सोर्स- फोटो नवभारत)
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Kanpur Kanya Janmotsav: राज्य महिला आयोग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान की अध्यक्षता में शनिवार को सर्किट हाउस, कानपुर नगर में आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के साथ शक्ति संवाद एवं कन्या जन्मोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उन्नति स्वयं सहायता समूह, जयशंकर, मां विंध्यवासिनी, शंकर, जय मां लक्ष्मी एवं विकास महिला स्वयं सहायता समूह सहित विभिन्न समूहों की महिलाओं ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में परियोजना निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, जिला प्रोबेशन अधिकारी, प्रमुख अधीक्षिका डफरिन चिकित्सालय, वन स्टॉप सेंटर के कर्मचारी तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने प्रतिभाग किया। महिलाओं ने माननीय अध्यक्ष के साथ संवाद करते हुए अपने अनुभव और सफलता की कहानियां साझा कीं।

सीआईएफ एवं सीसीएल के माध्यम से आर्थिक सहायता प्राप्त

शक्ति संवाद के दौरान कल्याणपुर विकासखंड की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सीआईएफ एवं सीसीएल के माध्यम से आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। इस धनराशि का उपयोग करते हुए उन्होंने दोना-पत्तल बनाने की मशीन तथा दो भैंस खरीदीं और स्वरोजगार शुरू किया। वर्तमान में वे आत्मनिर्भर होकर प्रतिमाह लगभग 15 से 18 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।

अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ वे अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा भी सुनिश्चित कर रही हैं। उनके एक बच्चे द्वारा एमबीए तथा दूसरे द्वारा फार्मेसी की शिक्षा प्राप्त की जा रही है।

शक्ति संवाद और कन्या जन्मोत्सव
शक्ति संवाद और कन्या जन्मोत्सव(सोर्स- फोटो नवभारत)
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महिलाओं ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले वे घर तक ही सीमित थीं और किसी आर्थिक गतिविधि से नहीं जुड़ी थीं। आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ समाज में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हुई हैं।

महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए

कार्यक्रम में पूनम, ज्योति एवं नेहा सहित अन्य महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आगे बढ़ने के अवसर मिले हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि समाज में उनका सम्मान और पहचान भी बढ़ी है।

कार्यक्रम के दौरान उर्सला अस्पताल की विंग द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत 16 बेबी किट उपलब्ध कराई गईं। माननीय अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने बेबी किट लाभार्थी महिलाओं को वितरित कीं। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण, बालिकाओं की शिक्षा तथा बेटियों के सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया गया।

अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा किए जा रहे प्रयासों और उनकी सफलता की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में स्वयं सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं स्वरोजगार के अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।

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सम्मानजनक एवं सशक्त पहचान भी स्थापित हो रही है

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं केवल आर्थिक रूप से ही सशक्त नहीं हो रही हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, स्वावलंबन और स्वयं निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित हो रही है। आर्थिक आत्मनिर्भरता से परिवार में महिलाओं की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ समाज में उनकी सम्मानजनक एवं सशक्त पहचान भी स्थापित हो रही है।

डॉ. चौहान ने कहा कि आज स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने हुनर और मेहनत के बल पर स्वरोजगार स्थापित कर रही हैं, परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं तथा अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा और भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह बदलाव महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक एवं प्रेरणादायक कदम है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं तथा स्वरोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाना तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना रहा।

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