

Expired Medicine Distribution Kanpur: शहर में पांडु नदी की बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बीच स्वास्थ्य विभाग की ओर से वितरित की गई दवाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। बर्रा मायापुरम इलाके में बाढ़ प्रभावित करीब 20 परिवारों को स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा दवाएं उपलब्ध कराई गई थीं। आरोप है कि इन दवाओं में शामिल एक सीरप की मियाद जुलाई 2026 में ही समाप्त हो चुकी थी। एक्सपायर्ड सीरप मिलने की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में लोगों के बीच चिंता बढ़ गई।
बताया जा रहा है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने के बाद उन्हें सरकारी स्तर से दवाएं उपलब्ध कराई गई थीं। हालांकि, दवा के पैकेट पर लिखी एक्सपायरी डेट देखने के बाद परिजनों ने सवाल उठाए। कुछ परिवारों का आरोप है कि सीरप का इस्तेमाल करने के बाद बच्चों की तबीयत खराब हुई। इसके बाद उन्होंने सरकारी दवाओं का इस्तेमाल बंद कर दिया और चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए दूसरे डॉक्टर से संपर्क किया।
पांडु नदी में आई बाढ़ के कारण बर्रा मायापुरम क्षेत्र के कई परिवार प्रभावित हुए हैं। बाढ़ की स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित परिवारों के बीच दवाओं का वितरण किया गया था। जानकारी के अनुसार करीब 20 परिवारों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
बाढ़ जैसी परिस्थितियों में दूषित पानी, साफ-सफाई की कमी और बदलते मौसम के कारण बच्चों तथा बुजुर्गों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य टीमों की ओर से प्रभावित लोगों को प्राथमिक उपचार और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्रम में प्रभावित क्षेत्र में दवा वितरण किया गया था।
बाढ़ पीड़ितों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा वितरित किए गए सीरप की पैकिंग पर एक्सपायरी डेट जुलाई 2026 दर्ज थी। चूंकि वर्तमान समय सितंबर 2026 है, इसलिए यह दवा निर्धारित मियाद से बाहर हो चुकी थी।
दवाओं की गुणवत्ता और उनकी वैधता स्वास्थ्य सेवाओं का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। खासतौर पर बच्चों को दी जाने वाली दवाओं के मामले में एक्सपायरी डेट की जांच आवश्यक होती है। ऐसे में यदि किसी सरकारी वितरण अभियान के दौरान मियाद समाप्त हो चुकी दवा पहुंचती है, तो इसकी जांच की जरूरत पैदा होती है।
बाढ़ प्रभावित परिवारों ने सीरप की एक्सपायरी डेट देखने के बाद कथित तौर पर सरकारी दवाओं को लेने से इनकार कर दिया। कुछ लोगों ने पहले से मिली दवाओं को भी इस्तेमाल करने के बजाय अलग कर दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी दवा लेने के बाद कुछ बच्चों की तबीयत खराब हुई। हालांकि, बच्चों की तबीयत बिगड़ने और कथित तौर पर एक्सपायर सीरप के सेवन के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध अभी स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग या किसी अधिकृत चिकित्सकीय जांच की रिपोर्ट सामने आना जरूरी है।
परिजनों के मुताबिक बच्चों की तबीयत को लेकर चिंता बढ़ने के बाद उन्होंने दूसरे डॉक्टर से संपर्क किया। डॉक्टर से उपचार मिलने के बाद बच्चों की स्थिति में सुधार होने की बात कही जा रही है।
इस पूरे मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि वितरित किए गए सीरप की वास्तविक स्थिति क्या थी, कितनी मात्रा में ऐसी दवा वितरित हुई और दवा वितरण से पहले उसकी गुणवत्ता तथा एक्सपायरी डेट की जांच किस स्तर पर की गई थी।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जुलाई 2026 में एक्सपायर हो चुकी दवा सितंबर में बाढ़ प्रभावित परिवारों तक कैसे पहुंची। यदि दवा की एक्सपायरी डेट वास्तव में समाप्त हो चुकी थी, तो वितरण से पहले स्टॉक की जांच क्यों नहीं की गई, यह भी जांच का विषय है।
साथ ही यह पता लगाना जरूरी होगा कि संबंधित सीरप का स्टॉक किस दवा भंडार से आया था और उसका वितरण किन परिस्थितियों में किया गया। यदि जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायत ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने सरकारी दवाओं का इस्तेमाल करने के बजाय दूसरे चिकित्सक से उपचार लेना बेहतर समझा। अब लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण पर है।