

Kanpur DM Jitendra Pratap Singh: शनिवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह बिरसिंहपुर में रिंकी मिश्रा के घर पहुंचे तो इस मुलाकात से पिछले संपूर्ण समाधान दिवस की यादें भी जुड़ गईं। तब रिंकी अपनी परेशानियां लेकर डीएम तक पहुंची थी, इस बार डीएम खुद उसके दरवाजे पर खड़े थे। इन दो मुलाकातों के बीच रिंकी के जीवन की तस्वीर काफी बदल चुकी थी। चेहरे पर चिंता की जगह मुस्कान थी और सामने पक्के आशियाने की दीवारें खड़ी हो रही थीं।
गत 18 जुलाई को अभावों से जूझ रही रिंकी करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर इस भरोसे के साथ जिलाधिकारी तक पहुंची थी कि उसकी बात सुनी जाएगी। 19 सितंबर को फिर घाटमपुर में संपूर्ण समाधान दिवस था, लेकिन इस बार रिंकी को वहां जाने की जरूरत नहीं पड़ी। जिलाधिकारी खुद उसका हाल जानने उसके घर पहुंचे।
जिलाधिकारी की पहल पर जनसहयोग से रिंकी का पक्का मकान बनवाया जा रहा है। दीवारें खड़ी हो चुकी हैं और जल्द लिंटर डालने की तैयारी है। जिस परिवार के लिए कभी कमजोर छत चिंता का कारण थी, वह अब अपने सामने पक्का आशियाना बनते देख रहा है। जिलाधिकारी ने निर्माण की प्रगति देखी और परिवार से बातचीत कर उनका हाल जाना।
रिंकी मिश्रा (41) की जिंदगी पिछले कई वर्षों से संघर्षों के बीच गुजर रही थी। पति राजीव मिश्रा की करीब 10 वर्ष पूर्व आकस्मिक मृत्यु के बाद दो बेटियों की पूरी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। बड़ी बेटी 16 वर्ष की है और पूर्णतः दिव्यांग होने के कारण उसे लगातार देखभाल की जरूरत रहती है, जबकि छोटी बेटी अदिति 14 वर्ष की है। आय का कोई स्थायी जरिया नहीं होने और बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण घर चलाने से लेकर बेटियों की पढ़ाई, इलाज और भविष्य तक की चिंता रिंकी को घेरे रहती थी।
रिंकी की जिंदगी की छोटी-बड़ी कई चिंताएं भी एक-एक कर कम हुई हैं। जिस घर में रोज के राशन की चिंता थी, वहां अब अंत्योदय राशन कार्ड बन चुका है और रसोई गैस कनेक्शन भी मिल गया है। रिंकी की निराश्रित महिला पेंशन शुरू हो गई है तो आयुष्मान कार्ड से परिवार को इलाज के खर्च की आर्थिक सुरक्षा मिली है। दिव्यांग बेटी का यूनिक आईडी कार्ड बन गया है, जिससे उसके लिए दिव्यांगजन कल्याण की योजनाओं का रास्ता खुला है। बेटियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से भी आच्छादित किया जा रहा है।
रिंकी के लिए एक बड़ा बदलाव अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिलना भी है। घर के निकट प्राथमिक विद्यालय में उसे रसोइया के रूप में काम मिल गया है। अब उसके पास नियमित आय का अपना जरिया है। कभी परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों और बेटियों के भविष्य को लेकर परेशान रहने वाली रिंकी के लिए सरकारी योजनाएं केवल कागजी लाभ नहीं रहीं, बल्कि उसके जीवन को आगे बढ़ाने का माध्यम बनी हैं।
अपने घर जिलाधिकारी को सामने देखकर रिंकी पिछली मुलाकात को याद किए बिना नहीं रह सकी। उसने बताया कि पिछले तहसील दिवस में वह डीएम साहब के पास गई थी और इस बार डीएम साहब खुद उसके घर आए हैं। सरकार की योजनाओं से उसे और उसके परिवार को बहुत मदद मिली है।
विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बेटी अदिति ने पढ़ाई का साथ नहीं छोड़ा। उसकी पढ़ाई आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो, इसके लिए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने पंडित राम यश मेमोरियल एजुकेशन सेंटर में उसका प्रवेश कराया और फीस भी जमा कराई थी। अब कक्षा सात की छात्रा अदिति ने यूनिट टेस्ट में प्रथम स्थान हासिल कर मां की उम्मीदों को नई उड़ान दी है। जिलाधिकारी उसके घर पहुंचे तो अदिति ने कहा कि वह भी बड़ी होकर डीएम बनना चाहती है और उनकी तरह सबकी मदद करना चाहती है।
उल्लेखनीय है कि रिंकी और जिलाधिकारी की पहली मुलाकात 18 जुलाई के संपूर्ण समाधान दिवस में हुई थी। घाटमपुर तहसील में सुनवाई समाप्त हो चुकी थी और जिलाधिकारी अपनी गाड़ी की ओर बढ़ रहे थे, तभी रिंकी उनके पास पहुंची थी। उसके हाथ में प्रार्थना पत्र तक नहीं था। गांव के लोगों और शुभचिंतकों ने उसे जिलाधिकारी से मिलने की सलाह दी थी। रिंकी को भरोसा था कि डीएम उसकी बात जरूर सुनेंगे। इसी उम्मीद ने उसे बिरसिंहपुर से घाटमपुर तक पैदल पहुंचाया था।
जिलाधिकारी के निर्देश पर उसी दिन उपजिलाधिकारी घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह रिंकी के घर पहुंचे थे। परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए तात्कालिक मदद उपलब्ध कराई गई और पात्रता के अनुसार विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल की गई थी। उसी पहल का असर अब रिंकी और उसके परिवार की बदली जिंदगी में दिखाई दे रहा है।