अधर में अटका मैनुअल DL को ऑनलाइन रिकॉर्ड से जोड़ने का कार्य, दो महीने से RTO कार्यालय के चक्कर लगा रहे आवेदक

Driving License Approval: पुराने मैनुअल ड्राइविंग लाइसेंस को ऑनलाइन रिकॉर्ड से जोड़ने की प्रक्रिया 200 से अधिक आवेदन अप्रूवल के इंतजार में हैं। मंजूरी की प्रक्रिया अटकने से आवेदकों की परेशानी बढ़ी है।
Kanpur Backlog Driving License Approval Delayed, Over 200 Records Await Headquarters Clearance
RTO कार्यालय (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Kanpur Backlog Driving License Approval: पुराने मैनुअल ड्राइविंग लाइसेंस को ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्मार्ट कार्ड व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया में आए बदलाव के बाद कानपुर में सैकड़ों आवेदकों की परेशानी बढ़ गई है।बैकलॉग ड्राइविंग लाइसेंस के डेटा की फीडिंग स्थानीय स्तर पर किए जाने के बावजूद अंतिम अप्रूवल मुख्यालय स्तर से होना है। बताया जा रहा है कि पिछले करीब दो महीनों से बैकलॉग डीएल के अप्रूवल की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

इसके चलते बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं और आवेदक समाधान के लिए आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।परिवहन विभाग में पुराने मैनुअल लाइसेंस के रिकॉर्ड को डिजिटल व्यवस्था में शामिल करने के लिए बैकलॉग फीडिंग की प्रक्रिया चल रही है।इस प्रक्रिया में अप्रूवल की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर से हटाकर मुख्यालय स्तर पर केंद्रित किए जाने के बाद आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पहले स्थानीय आरटीओ स्तर पर होता था अप्रूवल

विभागीय व्यवस्था के अनुसार, पहले पुराने ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित डेटा की फीडिंग और उसके अप्रूवल का काम स्थानीय आरटीओ कार्यालय स्तर पर ही पूरा किया जाता था। इससे आवेदन प्रक्रिया अपेक्षाकृत स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो जाती थी।हालांकि, जून 2026 में जारी नए दिशा-निर्देशों के बाद व्यवस्था में बदलाव किया गया।

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इसके तहत बैकलॉग डीएल के अंतिम अप्रूवल का अधिकार मुख्यालय स्तर पर केंद्रित कर दिया गया। इसके बाद स्थानीय परिवहन कार्यालय की भूमिका मुख्य रूप से डेटा फीडिंग तक सीमित रह गई है।अगस्त 2026 से स्थानीय स्तर पर बैकलॉग डीएल अप्रूवल की प्रक्रिया बंद है।अब स्थानीय कार्यालय द्वारा जिन आवेदकों का रिकॉर्ड ऑनलाइन फीड किया जा रहा है, उनकी फाइलें अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यालय स्तर पर निर्भर हैं।

दो महीने से एक भी अप्रूवल नहीं

आरआई (प्राविधिक) संतोष कुमार के अनुसार, रोजाना करीब 10 से 15 आवेदक बैकलॉग डीएल से जुड़ी समस्या लेकर आरटीओ कार्यालय पहुंच रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आवेदकों के पुराने लाइसेंस का डेटा सिस्टम में फीड किया जा रहा है, लेकिन अंतिम अप्रूवल नहीं हो पा रहा है।उनके मुताबिक, अब तक 200 से अधिक बैकलॉग डीएल का डेटा ऑनलाइन फीड किया जा चुका है।

इसके बावजूद अप्रूवल न मिलने के कारण ये रिकॉर्ड सिस्टम में लंबित दिखाई दे रहे हैं। विभागीय स्तर पर आवेदकों को मौजूदा स्थिति की जानकारी दी जा रही है, लेकिन समाधान में देरी के कारण लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।इस स्थिति में सबसे बड़ी समस्या उन लोगों के सामने है, जिन्हें अपने पुराने लाइसेंस को डिजिटल रिकॉर्ड में अपडेट कराना है। आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी अंतिम मंजूरी नहीं मिलने से वे आगे की प्रक्रिया को लेकर असमंजस में हैं।

ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं होने से चालान की चिंता

बैकलॉग डीएल के डिजिटल रिकॉर्ड में अपडेट नहीं होने से वाहन चालकों के सामने एक अन्य चिंता भी सामने आ रही है। खबर के अनुसार, ट्रैफिक चेकिंग के दौरान यदि किसी चालक का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस ऑनलाइन सिस्टम में उपलब्ध नहीं दिखता है, तो उसे दस्तावेज सत्यापन से संबंधित परेशानी हो सकती है।

आवेदकों का कहना है कि ऐसे मामलों में चालान की आशंका बनी रहती है। हालांकि, किसी विशेष मामले में चालान की कार्रवाई संबंधित परिस्थितियों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही तय होती है।

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यही वजह है कि आवेदक चाहते हैं कि पुराने मैनुअल डीएल को जल्द से जल्द डिजिटल रिकॉर्ड में अपडेट किया जाए, ताकि उन्हें सड़क पर दस्तावेज सत्यापन के दौरान अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य और मौजूदा चुनौती

पुराने कागजी या मैनुअल ड्राइविंग लाइसेंस रिकॉर्ड को डिजिटल व्यवस्था में शामिल करने का उद्देश्य रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। इसके साथ ही स्मार्ट कार्ड और ऑनलाइन रिकॉर्ड व्यवस्था से लाइसेंस संबंधी जानकारी को आसानी से सत्यापित करने की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

लेकिन व्यवस्था में बदलाव के दौरान स्थानीय स्तर से मुख्यालय स्तर पर अप्रूवल स्थानांतरित होने के कारण फिलहाल बैकलॉग मामलों में लंबित आवेदन एक चुनौती बन गए हैं। कानपुर में 200 से अधिक रिकॉर्ड ऑनलाइन फीड होने के बाद भी अप्रूवल की प्रतीक्षा में हैं।

अब आवेदकों की नजर मुख्यालय स्तर से होने वाली कार्रवाई पर है। यदि लंबित बैकलॉग डीएल का अप्रूवल समयबद्ध तरीके से शुरू होता है, तो आरटीओ कार्यालय में रोजाना पहुंच रहे आवेदकों की समस्या कम हो सकती है। फिलहाल विभागीय स्तर पर फीडिंग का काम जारी है और अंतिम मंजूरी का इंतजार बना हुआ है।

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