आईएएस अनुराग यादव (सोर्स- सोशल मीडिया)
IAS Anurag Yadav Clash With CEC: भारत निर्वाचन आयोग ने यूपी कैडर के 2000 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग यादव को पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ उनकी तीखी बहस हो गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान एक साधारण सवाल पोलिंग स्टेशनों की संख्या का जवाब देने में देरी और फिर उस पर हुई टिप्पणी के बाद मामला बिगड़ गया।
अनुराग यादव ने अपनी वरिष्ठता का हवाला देते हुए जवाब दिया, जिसे आयोग ने अनुशासनहीनता माना और देर रात उन्हें पद से मुक्त कर दिया। इस फैसले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
दरअसल, समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग स्टेशनों का विवरण मांगा था। अनुराग यादव तत्काल जवाब नहीं दे पाए जिस पर आयोग ने नाराजगी जताई। बताया जा रहा है कि इस पर यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि वह 25 साल से सेवा में हैं और उनसे इस तरह बात नहीं की जा सकती। इस बयान को चुनाव आयोग ने अनुशासनहीनता माना और सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया।
यह पहला मौका नहीं है जब अनुराग यादव विवादों में आए हैं। हाल ही में उन्हें आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव पद से हटाकर समाज कल्याण विभाग में भेजा गया था। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने ‘पुच एआई’ नाम की एक कथित कंपनी के साथ 25 हजार करोड़ रुपये का एमओयू साइन किया। इस मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा था जिसके बाद उनका तबादला किया गया।
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आजमगढ़ के रहने वाले अनुराग यादव का प्रशासनिक करियर काफी लंबा और विविध रहा है। वह जौनपुर, झांसी और लखनऊ जैसे जिलों में डीएम रह चुके हैं। इसके अलावा कृषि, शहरी विकास और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों में सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। जनवरी 2025 में उन्हें आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया था। फिलहाल वह समाज कल्याण और सैनिक कल्याण विभाग में तैनात हैं। हालांकि लगातार सामने आ रहे विवादों ने उनकी कार्यशैली और निर्णयों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे उनके प्रशासनिक करियर पर भी असर पड़ सकता है।