काशी की विरासत पर चला बुलडोजर! अब कहां मिलेगी प्रियंका गांधी की पसंदीदा कचौड़ी? पहलवान लस्सी की दुकान भी जमींदोज
वाराणसी के लंका चौराहे पर जिला प्रशासन ने 35 दुकानों पर बुलडोजर चला दिया। इस कार्रवाई में दो दुकानें भी जमींदोज हो गईं, जो बनारसी स्वाद की बड़ी पहचान थीं।
- Written By: अभिषेक सिंह
वाराणसी में लंका चौराहे पर चला बुलडोजर (सोर्स- सोशल मीडिया)
वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लंका चौराहे पर जिला प्रशासन ने 35 दुकानों पर बुलडोजर चला दिया। लंका चौराहे पर जाम की बड़ी समस्या से निजात दिलाने के लिए यह फैसला लिया गया। इस कार्रवाई में दो दुकानें भी जमींदोज हो गईं, जो बनारसी स्वाद की बड़ी पहचान थीं। इनका नाम पहलवान की लस्सी और चाची की कचौड़ी है।
दरअसल, इस कार्रवाई की मांग काफी समय से की जा रही थी। जिला प्रशासन ने मुआवजा देकर दुकानों पर बुलडोजर चला दिया, लेकिन अब आपको लंका चौराहे पर पहलवान की लस्सी और चाची की कचौड़ी का स्वाद नहीं मिलेगा। इन दुकानों का स्वाद लेने के लिए दूर-दूर से लोग आते थे। जिसके चलते कुछ लोग नाराज भी हैं।
राहत के साथ मिला दर्द!
पीडब्ल्यूडी ने मंगलवार रात को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। यह चौराहा वह स्थान है, जहां से ट्रामा सेंटर और काशी हिंदू विश्वविद्यालय, अस्सी घाट और बिहार के लिए सड़क जाती है। ऐसे में इस चौड़ीकरण से एक बड़ी समस्या से राहत मिलेगी। लेकिन काशी के लोगों में एक दर्द भी देखने को मिल रहा है।
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क्या बोले स्थानीय दुकानदार?
लोगों का कहना है कि ‘अब चाची की कचौड़ी और पहलवान की लस्सी कहां मिलेगी।’ वहीं स्थानीय दुकानदारों ने भी जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और उनकी रोजी-रोटी छीन ली गई।
लंका चौराहे पर स्थित चाची की कचौड़ी और पहलवान की लस्सी की दुकानें स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और बीएचयू के छात्रों के लिए भी खास थीं। करीब 100 साल पुरानी चाची की कचौड़ी की दुकान जलेबी और कचौड़ी के लिए मशहूर थी।
प्रियंका-डिंपल को भी पसंद थी चाची की कचौड़ी
यह दुकान चाची के निधन के बाद उनके परिवार द्वारा इसी नाम से चलाई जाती थी। वहीं पहलवान लस्सी की दुकान भी दशकों से लोगों की पसंदीदा थी, जहां लस्सी का स्वाद लेने के लिए लंबी कतारें लगी रहती थीं। ये दुकानें काशी की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा थीं, जहां नेता से लेकर अभिनेता और आम लोग रुककर स्वाद का लुत्फ उठाते थे। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और सपा सांसद डिंपल यादव भी चाची की कचौड़ी की मुरीद थीं।
इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए जहां कुछ लोग इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, वहीं चाची की कचौड़ी और पहलवान लस्सी जैसी ऐतिहासिक दुकानों के खत्म होने का दुख भी है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, ‘यह अच्छी बात है कि जाम की समस्या से राहत मिलेगी, लेकिन इन दुकानों की यादें हमेशा बनी रहेंगी।’
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कुछ लोगों ने इस बात पर नाराजगी भी जताई कि ऐसी विरासत को बचाने के लिए वैकल्पिक उपाय किए जा सकते थे। कार्रवाई के दौरान पहलवान लस्सी का दुकानदार भावुक हो गया और बुलडोजर के सामने खड़ा हो गया, लेकिन लंका थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्रा और स्थानीय लोगों ने उसे समझाकर वहां से हटा दिया।
