हस्तिनापुर में रोजगार योजना पर उठे सवाल, फर्जी श्रमिकों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कराने का आरोप

Hastinapur Rozgar Scheme: विकासखंड की ग्राम पंचायतों में रोजगार योजना में कथित फर्जी श्रमिकों की ऑनलाइन हाजिरी और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने भौतिक सत्यापन कराने की मांग की।
Hastinapur Rural Employment Scheme Under Scrutiny Over Alleged Fake Attendance and Government Fund Misuse
रोजगार योजना (सांकेतिक फोटो)
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Hastinapur Viksit Bharat Rozgar Scheme: विकासखंड की ग्राम पंचायतों में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (वीबी-जीआरएमजी) योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में कथित फर्जी श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराकर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। ग्राम दौलतपुर उर्फ मालीपुर निवासी राहुल कुमार ने लोकपाल अधिकारी को शिकायती पत्र देकर मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में गजरोला, गुढ़ा, हिमायुपुर, जलालपुर जोरा, किशोरपुर, मकदूमपुर, मानपुर, मीवा, नगली गजरौली, पाली, रठौड़ा खुर्द और सेफपुर फिरोजपुर ग्राम पंचायतों का उल्लेख किया गया है। वहीं, शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ स्थानों पर वास्तविक श्रमिकों की पर्याप्त मौजूदगी नहीं होने के बावजूद ऑनलाइन पोर्टल पर प्रतिदिन श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है और अभिलेखों में कार्य प्रगति भी दर्शाई जा रही है।

बारिश के दिनों में भी हाजिरी दर्ज करने का आरोप

शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से 26 सितंबर से लगातार हुई भारी बारिश का हवाला देते हुए जांच की मांग की है। पत्र के मुताबिक, क्षेत्र में खादर इलाके की स्थिति खराब रही और कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण भी कई जगह आवागमन प्रभावित होने का दावा किया गया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे स्थानों पर, जहां जलभराव या अत्यधिक कीचड़ के कारण सामान्य आवागमन तक प्रभावित रहा वहां योजना के तहत श्रमिकों की प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज कराकर काम कराए जाने की वास्तविकता की जांच जरूरी है।

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मस्टर रोल और ऑनलाइन हाजिरी मिलान की मांग

शिकायत में संबंधित ग्राम पंचायतों के मस्टर रोल, ऑनलाइन उपस्थिति, जॉब कार्ड, श्रमिकों के नाम और भुगतान संबंधी अभिलेखों का आपस में मिलान कराने की मांग की गई है। साथ ही उन तिथियों में दर्ज उपस्थिति का भौतिक सत्यापन कराने को कहा गया है, जब क्षेत्र में भारी बारिश और जलभराव की स्थिति थी। शिकायतकर्ता ने प्रत्येक संबंधित कार्यस्थल का मौके पर निरीक्षण कर यह सत्यापित करने की मांग की है कि ऑनलाइन पोर्टल और अभिलेखों में जिस कार्य को पूरा दिखाया गया है, वह वास्तव में मौके पर हुआ भी है या नहीं।

श्रमिकों से पूछताछ की मांग

शिकायती पत्र में संबंधित श्रमिकों से व्यक्तिगत रूप से पूछताछ कर यह सत्यापित कराने की मांग की गई है कि उन्होंने संबंधित तिथियों में वास्तव में काम किया था अथवा उनकी उपस्थिति किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दर्ज की गई। इसके अलावा ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने वाले संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों और ग्राम पंचायत स्तर पर जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि जांच में फर्जी श्रमिक, फर्जी उपस्थिति, गलत मस्टर रोल अथवा वास्तविक कार्य के बिना भुगतान की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए और सरकारी धन की रिकवरी कराई जाए।

जांच पूरी होने तक अभिलेखों से छेड़छाड़ रोकने की मांग

शिकायत में जांच पूरी होने तक संबंधित कार्यों और अभिलेखों को सुरक्षित रखने तथा उनमें किसी प्रकार के परिवर्तन या छेड़छाड़ पर रोक लगाने की भी मांग की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करना या व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं, बल्कि सरकारी योजना में खर्च होने वाले धन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और पात्र श्रमिकों को वास्तविक रोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने लोकपाल से मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

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झड़का गांव में बिना काम के लाख रुपये निकालने का आरोप

हस्तिनापुर विकासखंड के झड़का गांव में बिना काम कराए सरकारी धन निकालने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कराने की मांग करते हुए दावा किया है कि मस्टर रोल के माध्यम से लाख रुपये की धनराशि निकाल ली गई, जबकि मौके पर संबंधित कार्य हुआ ही नहीं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि संबंधित कार्य का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

आरोप है कि बिना काम कराए ही अभिलेखों में कार्य दर्शाकर सरकारी धन का भुगतान किया गया। उन्होंने इस पूरे मामले को भी जांच का विषय बताते हुए संबंधित अभिलेखों, मस्टर रोल, ऑनलाइन हाजिरी और भुगतान की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि बिना काम किए ही धनराशि निकाल ली जाती है तो इससे पात्र श्रमिकों का हक प्रभावित होता है। उन्होंने अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।

उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में मौके पर कितना काम हुआ और उसके नाम पर कितनी धनराशि निकाली गई। साथ ही दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और सरकारी धन की रिकवरी की मांग की गई है।

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