तीन कुलपतियों का कार्यकाल बीता, फिर भी नहीं खुला छात्रावास; आगामी सत्र में संचालन शुरू होने की उम्मीद

Gorakhpur University: पांच वर्षों से बंद गोरखपुर विश्वविद्यालय का सबसे प्राचीन छात्रावास बदहाली की दास्तां बयान कर रहा है। यदि भवन को दुरुस्त कर दोबारा शुरू किया जाए तो विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
Gorakhpur University Nath Chandrawat Hostel
जर्जर स्थिति में नाथ चंद्रावत छात्रावास (रिपोर्ट: नवभारत लाइव)
Published on: 
Updated on: 

Highlights

  • 500 छात्रों की क्षमता वाला नाथ चंद्रावत छात्रावास पांच साल से बंद

  • जर्जर भवन और जंगल में तब्दील परिसर

  • बार-बार मुद्दा उठाए जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं

Gorakhpur University Hostel: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में एक ओर शैक्षणिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की बात होती है, तो दूसरी ओर विश्वविद्यालय का सबसे प्राचीन छात्रावास अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। करीब 500 छात्रों के रहने की क्षमता वाला नाथ चंद्रावत छात्रावास पिछले पांच वर्षों से बंद पड़ा है। इस दौरान तीन कुलपतियों का कार्यकाल बीत चुका है, लेकिन छात्रावास की स्थिति में सुधार नहीं हो सका। कभी विद्यार्थियों की शैक्षणिक और आवासीय गतिविधियों का केंद्र रहा यह परिसर आज जर्जर भवनों और झाड़ियों के बीच अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहा है।

छात्रावास की मौजूदा स्थिति विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली और विद्यार्थियों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर रही है। सवाल यह है कि जब छात्रावास में लगभग 500 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था हो सकती है, तो आखिर पांच वर्षों से इसे बंद क्यों रखा गया है? क्या इसकी मरम्मत और पुनः संचालन के लिए कोई ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की गई?

हालांकि, इस मामले में विश्वविद्यालय के चीफ वार्डन प्रो. अजय शुक्ल का कहना है कि छात्रावास को दोबारा शुरू करने के संबंध में विश्वविद्यालय के आला अधिकारियों से बातचीत चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी शैक्षणिक सत्र में छात्रावास का संचालन शुरू हो जाएगा।

Gorakhpur University Nath Chandrawat Hostel
जर्जर स्थिति में नाथ चंद्रावत छात्रावास (रिपोर्ट: नवभारत लाइव)

500 छात्रों की क्षमता, फिर भी पांच साल से बंद

नाथ चंद्रावत छात्रावास विश्वविद्यालय के पुराने छात्रावासों में शामिल है। इसकी क्षमता लगभग 500 छात्रों की बताई जाती है। इसके बावजूद पिछले पांच वर्षों से छात्र यहां रहकर अपनी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। छात्रावास बंद होने के कारण इसकी इमारतों की स्थिति लगातार खराब होती गई और परिसर में झाड़ियां तथा जंगल जैसी स्थिति बन गई है।

छात्रावास की बदहाली केवल भवनों तक सीमित नहीं है। परिसर की मौजूदा स्थिति भी लंबे समय से देखरेख और रखरखाव की कमी की ओर इशारा करती है। जिस स्थान पर कभी विद्यार्थियों की आवाजाही और शैक्षणिक गतिविधियां होती थीं, वहां आज वीरानी दिखाई देती है।

ऐसे में छात्रावास के पुनः संचालन का सवाल केवल एक पुराने भवन की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध आवासीय सुविधाओं के बेहतर इस्तेमाल से भी जुड़ा है।

Gorakhpur University Nath Chandrawat Hostel
जर्जर स्थिति में नाथ चंद्रावत छात्रावास (रिपोर्ट: नवभारत लाइव)
Gorakhpur University Nath Chandrawat Hostel
गोरखपुर में बड़ा हादसा: विसर्जन के दौरान करेंट लगने से 3 की मौत, कई लोग झुलसे

तीन कुलपति बदले लेकिन नहीं बदली छात्रावास की तस्वीर

पिछले पांच वर्षों में विश्वविद्यालय में तीन कुलपतियों का कार्यकाल बीतने के बावजूद नाथ चंद्रावत छात्रावास की स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हो सका। विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान में किसी छात्रावास का इतने लंबे समय तक बंद रहना कई सवाल खड़े करता है।

छात्रों के लिए छात्रावास केवल रहने की जगह नहीं होता, बल्कि यह उनकी पढ़ाई, दिनचर्या और विश्वविद्यालय जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। खासकर दूसरे जिलों और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए परिसर में आवासीय सुविधा उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण है।

ऐसे में 500 छात्रों की क्षमता वाले छात्रावास का वर्षों तक बंद रहना विश्वविद्यालय की उपलब्ध सुविधाओं के उपयोग और उनके रखरखाव पर सवाल खड़ा करता है। यदि भवन की मरम्मत, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त कर इसे दोबारा शुरू किया जाए, तो इससे विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है।

Gorakhpur University Nath Chandrawat Hostel
जर्जर स्थिति में नाथ चंद्रावत छात्रावास (रिपोर्ट: नवभारत लाइव)

छात्रों और छात्र संगठनों के ज्ञापन भी नहीं आए काम

नाथ चंद्रावत छात्रावास की स्थिति में सुधार की मांग को लेकर छात्र और विभिन्न छात्र संगठन कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन दे चुके हैं। इसके बावजूद छात्रावास को दोबारा शुरू करने की दिशा में अब तक कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आया है।

छात्र संगठनों की ओर से बार-बार मुद्दा उठाए जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता के आरोपों को बल देता है। विद्यार्थियों की मांग है कि छात्रावास की स्थिति का आकलन कराया जाए, जर्जर भवनों की मरम्मत हो और परिसर को साफ-सुथरा बनाकर इसे फिर से उपयोग के योग्य बनाया जाए।

छात्र तोष निधि त्रिपाठी का कहना है कि नाथ चंद्रावत छात्रावास को जल्द से जल्द खोला जाना चाहिए। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले ऐसे कई विद्यार्थी हैं, जिन्हें रहने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि 500 छात्रों की क्षमता वाले इस छात्रावास का संचालन शुरू हो जाता है, तो विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की मांग को गंभीरता से लेते हुए मरम्मत और साफ-सफाई का काम जल्द पूरा कराना चाहिए।

वहीं, छात्र समीर उपाध्याय का कहना है कि विश्वविद्यालय का इतना पुराना छात्रावास पांच वर्षों से बंद रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। छात्रावास की इमारत और परिसर की स्थिति को सुधारकर इसे फिर से विद्यार्थियों के लिए शुरू किया जाना चाहिए। छात्र कई बार इस मुद्दे को उठा चुके हैं, ऐसे में अब केवल आश्वासन देने के बजाय प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। छात्रावास खुलने से विद्यार्थियों को आवास की सुविधा मिलेगी और विश्वविद्यालय के संसाधनों का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा।

Gorakhpur University Nath Chandrawat Hostel
जर्जर स्थिति में नाथ चंद्रावत छात्रावास (रिपोर्ट: नवभारत लाइव)
Gorakhpur University Nath Chandrawat Hostel
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव में मतदान जारी, कड़ी सुरक्षा के बीच अपने मत का प्रयोग कर रहे 54,910 मतदाता

चीफ वार्डन बोले- आगामी सत्र में शुरू होगा संचालन

नाथ चंद्रावत छात्रावास को दोबारा शुरू करने को लेकर विश्वविद्यालय के चीफ वार्डन प्रो. अजय शुक्ल ने बताया कि इस विषय में विश्वविद्यालय के आला अधिकारियों से बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र में छात्रावास का संचालन शुरू हो जाएगा।

आखिर कब खुलेगा नाथ चंद्रावत छात्रावास?

नाथ चंद्रावत छात्रावास की बदहाली के बीच सबसे बड़ा सवाल इसके पुनः संचालन को लेकर है। लगभग 500 छात्रों की क्षमता वाले इस छात्रावास को पांच वर्षों से बंद रखे जाने के कारणों और इसके भविष्य पर विश्वविद्यालय प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

छात्रों को उम्मीद है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए छात्रावास की मरम्मत, परिसर की सफाई और आवश्यक सुविधाओं की बहाली के लिए ठोस कदम उठाएगा। चीफ वार्डन की ओर से आगामी सत्र में संचालन शुरू करने की बात कही गई है। अब विद्यार्थियों की नजर इस पर है कि यह आश्वासन कब तक धरातल पर उतरता है।

रिपोर्ट:- अनुराग मिश्रा

Navbharat Live
navbharatlive.com