न छोटे हाथ डरे, न आवाज दबी: फतेहपुर में बच्चों की बगावत ने हिला दिया सिस्टम, सड़क पर उतरे 1800 छात्र
Fatehpur News: किशनपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज में करीब 1800 छात्रों ने पानी, बिजली, पंखे, शौचालय व अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने स्कूल प्रशासन के व्यवहार को लेकर भी आरोप लगाए।
- Reported By: प्रदीप कुमार रावत | Edited By: स्निग्धा श्रीवास्तव
फतेहपुर में छात्रों का प्रदर्शन (फोटो नवभारत)
Fatehpur Student Protest: जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और कॉपियां होनी चाहिए थीं, उसी उम्र में फतेहपुर की सड़कों पर हजारों छोटे-बड़े छात्र अपने हक की आवाज बुलंद करते नजर आए। गर्मी से बेहाल बच्चे, पानी के लिए परेशानी और स्कूल की बदहाल व्यवस्थाओं ने आखिरकार छात्रों के सब्र का बांध तोड़ दिया। किशनपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज में ऐसा छात्र आंदोलन खड़ा हुआ कि कुछ ही देर में स्कूल प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक हड़कंप मच गया।
मामला किशनपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज का है, जहां कक्षा छह से लेकर 12वीं तक के छात्र-छात्राएं स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर लामबंद हो गए। देखते ही देखते विरोध ने बड़ा रूप ले लिया और करीब 1800 छात्र सड़क पर उतर आए। बच्चों के इस अप्रत्याशित आक्रोश को देखकर प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और छात्रों की समस्याएं सुननी पड़ीं।
गर्मी ने निकाला दम, पानी के लिए भी परेशानी
छात्रों का कहना था कि भीषण गर्मी में कक्षाओं में पर्याप्त पंखे तक नहीं चल रहे थे। साफ पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी और शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब बताई गई। बच्चों का आरोप था कि लंबे समय से इन समस्याओं की शिकायत की जा रही थी, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।
जब शिकायतें कागजों और कमरों के भीतर दबती रहीं तो बच्चों ने स्कूल की चारदीवारी से बाहर निकलकर अपनी आवाज सड़क तक पहुंचा दी।
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सिर्फ सुविधाओं का सवाल नहीं, व्यवहार पर भी उठे सवाल
प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्कूल के प्रधानाचार्य और कुछ शिक्षकों के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। छात्रों का दावा था कि दस्तावेज और मार्कशीट से जुड़े कामों के लिए अतिरिक्त पैसे मांगे जाते हैं। विरोध की आवाज उठाने वाले छात्रों को कथित तौर पर कार्रवाई और फेल करने तक की धमकी दिए जाने के आरोप भी सामने आए।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन छात्रों के बड़े पैमाने पर सड़क पर उतर आने से विद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।
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हाथों में बाबा साहेब की तस्वीर, जुबां पर अधिकारों की आवाज
प्रदर्शन के दौरान कई छात्र हाथों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें और तख्तियां लेकर नजर आए। बच्चों का संदेश साफ था—शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बेहतर और सम्मानजनक माहौल में पढ़ने का अधिकार भी उनका हक है।
सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि आंदोलन की अगुवाई किसी बड़े संगठन या राजनीतिक दल ने नहीं की, बल्कि स्कूल के ही छात्र अपनी समस्याओं को लेकर एकजुट हुए।
जब बच्चों के सवालों के सामने पहुंच गया प्रशासन
छात्रों की संख्या बढ़ती गई तो मामला स्कूल की सीमा से निकलकर प्रशासन तक पहुंच गया। स्थिति को संभालने के लिए एडीएम और एएसपी समेत अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों की समस्याएं सुनीं और व्यवस्थाओं में सुधार का भरोसा दिलाया। यानी जिन बच्चों की आवाज लंबे समय से स्कूल की दीवारों के भीतर दब रही थी, वही आवाज सड़क पर पहुंचते ही अधिकारियों के दरवाजे तक पहुंच गई।
फतेहपुर का यह छात्र प्रदर्शन सिर्फ एक स्कूल की अव्यवस्थाओं की कहानी नहीं है। यह उस बदलते दौर की तस्वीर भी है, जहां नई पीढ़ी सवाल पूछ रही है, अपने अधिकारों को समझ रही है और जवाब मांगने के लिए सामने आने से डर नहीं रही। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि बच्चों ने प्रदर्शन क्यों किया, बड़ा सवाल यह है कि आखिर उन्हें अपनी बात सुनाने के लिए सड़क पर उतरने की नौबत आई ही क्यों?
