भाजपा का ‘मिशन 2027’, बिहार की तर्ज पर UP में भी 1 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का प्लान; रणनीति तैयार
बिहार में NDA को प्रचंड जीत के बाद अब BJP ने महिला मॉडल पर ही चलते हुए UP के 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तैयारी कर ली है। जीविका दीदी की तरह यहां भी कोई योजना लाई जाएगी।
- Written By: सौरभ शर्मा
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार मिशन 2027 प्लान तैयार (फोटो- सोशल मीडिया)
BJP Target Woman in Up coming Uttar Pradesh Assembly Election: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत और 202 सीटों के जादुई आंकड़े से भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकारों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। इस जीत की गूंज अब पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी सुनाई दे रही है। बिहार में मिली सफलता के पीछे महिलाओं का एकतरफा समर्थन और ‘जीविका दीदी’ मॉडल को सबसे बड़ा कारक माना जा रहा है। इसी फॉर्मूले को अब उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार मिशन 2027 के लिए अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि यूपी में भी महिलाओं के लिए खजाना खुलने वाला है।
योगी सरकार के मंत्री और संगठन के पदाधिकारी इस बात को बखूबी समझ चुके हैं कि आज के दौर में महिलाएं किसी भी चुनाव की दिशा बदलने की ताकत रखती हैं। मध्यप्रदेश की लाडली बहना, महाराष्ट्र की माझी लड़की और हरियाणा की योजनाओं के सफल प्रयोग के बाद अब यूपी की बारी है। बिहार चुनाव में जिस तरह महिलाओं के खाते में दस-दस हजार रुपये की सहायता राशि भेजी गई और उसके बाद जो नतीजे आए, उसने यूपी भाजपा को एक नई राह दिखा दी है। अब तैयारी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की है, जो सीधे तौर पर विपक्ष के हर समीकरण को ध्वस्त कर सकती है।
‘जीविका’ से ‘लखपति’ तक का सफर
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने चुनाव से ठीक पहले महिला रोजगार योजना के तहत हर परिवार की एक महिला को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए दस हजार रुपये की आर्थिक मदद दी थी। इसका असर यह हुआ कि एनडीए को उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, जो बिहार चुनाव में पर्यवेक्षक की भूमिका में थे, उन्होंने इस ‘साइलेंट वोटर’ की ताकत को करीब से देखा है। लखनऊ लौटते ही उन्होंने अधिकारियों के सामने एक बड़ा लक्ष्य रख दिया है। पहले जहां लक्ष्य छोटा था, वहीं अब यूपी में एक करोड़ लखपति दीदी बनाने की तैयारी है।
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केशव प्रसाद मौर्य का मानना है कि स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करके भाजपा अपना वोट बैंक सुरक्षित कर सकती है। यूपी में अभी लगभग 98 लाख महिलाएं इन समूहों से जुड़ी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का गणित भी यही कहता है कि अगर परिवार की एक महिला को साध लिया जाए, तो घर के कम से कम पांच वोट प्रभावित होते हैं। सपा के पीडीए फॉर्मूले की काट के तौर पर भाजपा अब इसी महिला शक्ति पर दांव लगाने जा रही है। माना जा रहा है कि 2027 की शुरुआत में ही सरकार इस संबंध में कोई ऐतिहासिक घोषणा कर सकती है।
विधायकों की रिपोर्ट और 2027 की चुनौती
इस पूरी रणनीति में एक एक्सक्लूसिव जानकारी यह भी निकलकर सामने आई है कि यूपी के जो 100 से ज्यादा विधायक मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के लिए गए थे, उन्होंने भी नेतृत्व को यही फीडबैक दिया है। विधायकों ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि लाडली बहना जैसी योजनाओं ने जमीन पर माहौल बदल दिया था और यूपी में भी ऐसी ही किसी बड़ी योजना की सख्त जरूरत है। हरियाणा, महाराष्ट्र और अब बिहार में जीत के बाद सीएम योगी पर 2027 में बड़ी जीत दर्ज करने का भारी दबाव है।
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भले ही सीएम योगी आज पीएम मोदी के बाद देश के सबसे लोकप्रिय स्टार प्रचारक हैं और उनके पास सत्ता का लंबा अनुभव है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली सीटों की गिरावट ने पार्टी को सतर्क कर दिया है। विधानसभा चुनाव में अब बमुश्किल 13 से 14 महीने का वक्त बचा है। दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है, इसलिए भाजपा नेतृत्व कोई रिस्क नहीं लेना चाहता। पार्टी का पूरा फोकस अब यूपी की सवा सात करोड़ महिला वोटरों पर है। पश्चिम बंगाल चुनाव निपटाने के बाद पार्टी अपनी पूरी ताकत यूपी के रण में झोंक देगी, जिसकी धुरी इस बार ‘लखपति दीदी’ बनने वाली है।
