कहीं कम न हो जाए भाजपा की एक और सीट, हाईकोर्ट पहुंचा भदोही सांसद डॉ. विनोद बिंद की जीत का मामला
लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी को एक और झटका लग सकता है। उनकी हाथ से एक और सीट निकल सकती है। ललितेश पति त्रिपाठी ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने उन्के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने की मांग की है।
- Written By: शानू शर्मा
ललितेश पति त्रिपाठी-डॉ. विनोद बिंद (सौजन्य सोशल मीडिया)
लखनऊ: लोकसभा में भारतीय जनात पार्टी को एक बड़ा झटका लग सकता है। टीएमसी उम्मीदवार ललितेश पति त्रिपाठी ने बीजेपी के सिंबल पर भदोही से चुनाव लड़ने वाले डा. विनोद बिंद के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने उनकी जीत को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी है। दायर की गई याचिका में बिंद के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने की मांग की है।
त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि बिंद ने निषाद पार्टी में रहते हुए भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा है। उनके इस कृत्य को संविधान की 10वीं अनुसूची एवं लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
चुनावी मैदान में हार गए थे जंग
टीएमसी नेता ललितेश पति त्रिपाठी ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि मैंने इस मामले में इलाहाबाद के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष एक याचिका प्रस्तुत की है। जिसमें भदोही लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद के रूप में डॉ विनोद कुमार बिंद के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने की मांग की है। बीजेपी के सिंबल पर भदोही से चुनाव में उतरे डा. विनोद बिंद ने ही टीएमसी उम्मीदवार ललितेश पति त्रिपाठी को चुनाव में हरा दिया था।
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पुराना इतिहास
आपको बता दें कि इसके पहले भी कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता पंडित कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र और मझवां विधानसभा सीट से पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी को 2022 के विधानसभा चुनाव में भी डॉक्टर विनोद बिंद ने निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव हरा दिया था। इसके बाद जब ललितेश पति त्रिपाठी ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी तो उन्होंने अखिलेश यादव से मुलाकात करके अपने लिए भदोही लोकसभा सीट मांगी थी। अखिलेश यादव ने उन्हें अपने कोटे की एक सीट दे दी, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी सहयोगी निषाद पार्ची के विधायक डॉ. विनोद बिंद को भाजपा उम्मीदवार बनाकर उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतार दिया था।
