चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी, क्यों SIT के निशाने पर आए ट्रस्ट के दो बड़े चेहरे
Champat Rai Resignation: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पद से इस्तीफा दे दिया है।
- Written By: मनोज आर्या
चंपत राय और अनिल मिश्रा, ( AI जेनरेटेड इमेज)
Champat Rai Resignation In Ram Mandir Case: अयोध्या के राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों तक पहुंच गई है। बढ़ते राजनीतिक दबाव, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की ताबड़तोड़ कार्रवाई और कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और संस्थापक ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक FIR में इन दोनों शीर्ष पदाधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन उनके प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज जांच के दायरे में आने के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
समाजवादी पार्टी (सपा) और आम आदमी पार्टी (आप) समेत पूरे विपक्ष का यह स्पष्ट आरोप था कि चंदे और चढ़ावे के प्रबंधन के मुख्य कर्ता-धर्ता होने के नाते दोनों पदाधिकारी इतने बड़े घोटाले से अनजान नहीं रह सकते। विपक्षी नेताओं की दलील थी कि इनके पदों पर रहते हुए निष्पक्ष जांच संभव नहीं है और जांच की आड़ में सिर्फ ‘छोटी मछलियों’ को बलि का बकरा बनाकर ‘बड़ी मछलियों’ को बचाने की साजिश रची जा रही है।
चंपत राय पर क्यों उठे सवाल?
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता चंपत राय राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक एक केंद्रीय चेहरा रहे हैं। ट्रस्ट के महासचिव के रूप में वे पूरे प्रशासनिक ढांचे, वित्तीय व्यवस्था, भूमि सौदों और मंदिर के रोजाना के प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी संभाल रहे थे। लेकिन मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये के चढ़ावे और कीमती चांदी के सामान का आधिकारिक रिकॉर्ड न रखने के आरोपों के बाद वे सीधे जांच के घेरे में आ गए। SIT की जांच में सामने आया कि चंपत राय का करीबी और ड्राइवर रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव इस पूरे चोरी नेटवर्क का एक अहम हिस्सा था।
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सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड और खर्चों का ब्यौरा मांगा था, जिसके बाद SIT ने चंपत राय से प्रशासनिक प्रक्रियाओं और वित्तीय निगरानी को लेकर कई दौर की पूछताछ की। चंपत राय लगातार ट्रस्ट के ऑडिट को पारदर्शी बताते रहे हैं।
SIT की जांच और गिरफ्तारियां
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT की शुरुआती रिपोर्ट और दर्ज FIR के आधार पर अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू यादव, कैश काउंटिंग प्रभारी अनुकल्प मिश्रा और नकदी गिनने वाले कई निजी कर्मचारी शामिल हैं। मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद गिरफ्तार किए गए कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति और बैंक खातों में अचानक संदिग्ध रूप से बड़ा उछाल देखा गया, जिसकी गहन जांच चल रही है। SIT की आंतरिक रिपोर्ट में जांच के दायरे में शामिल 17 लोगों की सूची में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के नाम भी शामिल थे, जिसके कारण बने भारी राजनीतिक दबाव के बाद दोनों ने पद से हटना ही मुनासिब समझा।
अनिल मिश्रा की भूमिका और जांच का दायरा
अयोध्या के वरिष्ठ चिकित्सक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े डॉ. अनिल मिश्रा ट्रस्ट के उन संस्थापक सदस्यों में से हैं, जिन्हें मंदिर के चढ़ावे, कैश की गिनती, सुरक्षित भंडारण और बैंकिंग व्यवस्था की सीधी निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था। SIT की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि जिस कैश काउंटिंग हॉल से चोरी की कड़ियां जुड़ी हैं, उसकी और वहां तैनात निजी कर्मचारियों की निगरानी का दायरा डॉ. अनिल मिश्रा के अधीन था।
एजेंसियों ने उनसे करीब चार घंटे तक कैश काउंटिंग की प्रक्रिया और गिरफ्तार कर्मचारियों से उनके संबंधों को लेकर सवाल-जवाब किए। इसके अलावा, राम मंदिर निर्माण के दौरान हुए कुछ पुराने भूमि सौदों में गवाह के रूप में उनकी मौजूदगी को लेकर भी चर्चाएं दोबारा शुरू हो गई हैं।
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चंपत राय-अनिल मिश्रा को क्लीन चिट नहीं
फिलहाल, SIT ने डॉ. अनिल मिश्रा और चंपत राय को क्लीन चिट नहीं दी है, लेकिन उन्हें सीधे तौर पर आरोपी भी नहीं बनाया गया है। दोनों के इस्तीफे को जांच को निष्पक्ष बनाए रखने और ट्रस्ट की साख को बचाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
