NALSAR में CJI के विरोध पर BCI का बड़ा एक्शन, 2026 बैच के छात्रों के वकील बनने पर लगाई रोक

NALSAR CJI Controversy: NALSAR में CJI के प्रस्तावित कार्यक्रम के विरोध पर BCI सख्त हो गई है। 2026 बैच के छात्रों का नामांकन फिलहाल रोका गया है और कुलपति से 3 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है।
NALSAR CJI Controversy
सांकेतिक तस्वीर Social Media
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NALSAR University Protest: हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के प्रस्तावित कार्यक्रम के विरोध को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने कड़ा रुख अपनाया है। BCI ने अगले आदेश तक NALSAR से 2026 में कानून की डिग्री हासिल करने वाले किसी भी छात्र का वकील के रूप में नामांकन नहीं करने का निर्देश दिया है।

BCI ने विश्वविद्यालय के कुलपति से पूरे मामले पर तीन दिन के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी है। परिषद का कहना है कि मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, इसलिए विश्वविद्यालय से प्रमाणित जानकारी हासिल की जा रही है।

CJI के विरोध को लेकर क्या है मामला?

पिछले दिनों कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि NALSAR के कुछ छात्रों ने कॉकरोच जनता पार्टी के छात्र आंदोलन को लेकर CJI की कथित टिप्पणियों के विरोध में विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रों ने कहा था कि अगर वार्षिक दीक्षांत समारोह में CJI को आमंत्रित किया जाता है तो वे कार्यक्रम का बहिष्कार करेंगे। इसी मामले को लेकर अब BCI ने विश्वविद्यालय से पूरी जानकारी मांगी है।

3 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

BCI की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि वह देश में कानूनी शिक्षा और वकीलों के पेशे से जुड़ी नियामक संस्था है। ऐसे मामले में वह चुप नहीं रह सकती। हालांकि, परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल मीडिया या सोशल मीडिया में सामने आई जानकारी के आधार पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

NALSAR से मिली रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा के बाद 19 अगस्त को आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

NALSAR से मांगी गई कई अहम जानकारियां

BCI ने विश्वविद्यालय प्रशासन से CJI के प्रस्तावित कार्यक्रम के विरोध में दिए गए ज्ञापन की कॉपी मांगी है। इसके साथ ही ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले छात्रों की पूरी सूची भी मांगी गई है।

विश्वविद्यालय से यह भी पूछा गया है कि अभियान शुरू करने, ज्ञापन तैयार करने, बैठकें आयोजित करने और उसे मीडिया या सोशल मीडिया पर प्रचारित करने में किन लोगों की प्रमुख भूमिका थी।

अगर किसी फैकल्टी सदस्य, रिसर्च स्कॉलर, पूर्व छात्र या बाहरी व्यक्ति ने इस अभियान को शुरू करने या संचालित करने में भूमिका निभाई है तो उसका विवरण भी BCI को देना होगा।

‘आलोचना का अधिकार है, लेकिन धमकी या दबाव उचित नहीं’

BCI ने कहा कि कानून के छात्रों को आलोचनात्मक सोच रखने, बहस करने और न्यायिक फैसलों का विश्लेषण एवं आलोचना करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, परिषद के मुताबिक किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ धमकी, दबाव, व्यक्तिगत अपमान या संगठित बहिष्कार को उचित नहीं माना जा सकता।

BCI ने कहा कि जो छात्र भविष्य में वकील बनने जा रहे हैं, उनसे देश के सर्वोच्च न्यायिक पद का सम्मान करने की अपेक्षा की जाती है।

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फिलहाल छात्रों को अयोग्य घोषित नहीं किया गया

BCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी छात्र को Advocates Act की धारा 24A के तहत वकील के रूप में नामांकन के लिए अयोग्य घोषित नहीं किया गया है।

विश्वविद्यालय की रिपोर्ट मिलने के बाद अगर किसी छात्र या अन्य व्यक्ति की भूमिका की कानूनी जांच जरूरी समझी जाती है, तो संबंधित नाम राज्य बार काउंसिलों को भेजे जा सकते हैं। जांच पूरी होने तक ऐसे लोगों का वकील के रूप में नामांकन लंबित रखा जा सकता है।

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