Explainer: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 8 आरोपी गिरफ्तार, जानिए किसकी क्या थी जिम्मेदारी, कौन था मास्टरमाइंड?

Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चंपत राय के ड्राइवर समेत सभी आठ नामजद आरोपियों को हिरासत में ले लिया है।
Ayodhya Ram Mandir Donation Embezzlement
अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले आठ आरोपी गिरफ्तार (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Ayodhya Ram Mandir Donation Embezzlement: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गठित की गई एसआईटी टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। एसआईटी ने अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले में नामजद सभी आठ आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में एफआईआर दर्ज करते हुए मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया था।

पुलिस ने गुरुवार को BNS की धाराओं 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत FIR दर्ज की गई थी। एसआईटी ने कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है। इन सभी आरोपियों पर चोरी, विश्वासघात और आपराधिक षड़यंत्र समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आइए आपको बताते हैं कि गिरफ्तार किए आरोपियों में कौन-कौन शामिल है? आरोपी किस पद पर थे? और इस हेराफेरी को उन्हें कैसे अंजाम दिया?

चोरी में चंपत राय के ड्राइवर शामिल

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आते ही सबसे पहले उंगली राम मंदिर का संचालन संभालने संस्था श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर उठी। एसआईटी ने अपनी एफआईआर में चंपत राय का नाम शामिल नहीं किया है। हालांकि, इसमें उनके करीबी और ड्राइवर राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को आरोपी बनाया गया है।

Ayodhya Ram Mandir Donation Embezzlement
चंपत राय के ड्राइवर राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू भी चोरी में शामिल (सोर्स- सोशल मीडिया)

जानकारी के मुताबिक, टिन्नू लंबे समय से चंपत राय का ड्राइवर है, इसके चलते उसके पास राम मंदिर के हर स्थान पर जाने की आजादी थी। वह बिना किसी रोकटोक के कैश काउंटिंग रूम से लेकर सभी कार्यालयों में आ जा सकता था। यहा तक कि उसके पास कैश काउंटिंग रूम की चाबी तक थी। माना जा रहा है कि इसका फायदा उठाकर ही उसने चढ़ावे की चोरी करना शुरु किया होगा।

सुभाष श्रीवास्तव

एसआईटी की एफआईआर के मुताबिक राम शंकर यादव के बाद इस मामले में दूसरा बड़ा नाम सुभाष श्रीवास्तव का है। सुभाष तीर्थयात्री सुविधा केंद्र के कैश काउंटिंग इंचार्ज के पद पर कार्यरत थे। दान पेटियों से निकली नकदी की गिनती की निगरानी और प्रक्रिया की जिम्मेदारी उनके ही पास थी। जिसका फायदा उठाकर उन्होंन दान के पैसों में हेरफेर किया।

जिनकी जिम्मेदारी थी उन्होंने ही की चोरी

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राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (सोर्स- सोशल मीडिया)

चंपत राय के ड्राइवर राम शंकर यादव और सुभाष श्रीवास्तव के अलावा अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रामाशंकर मिश्रा को एसआईटी ने आरोपी बनाया है। यह सभी कैश काउंटिंग टीम के सदस्य थे। दान के पैसों को गिनने से लेकर उसे बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी उन्हीं लोगों के पास थी। जिसका फायदा उठाकर इन लोगों ने चोरी को अंजाम दिया।

कैसे हुआ खुलासा?

Ayodhya Ram Mandir Donation Embezzlement
हिडन कैमरे से खुली चोरी की पोल (AI जनरेटेड फोटो)

जानकारी के मुताबिक, मंदिर में पिछले कुछ समय से 500 की गड्डी की कमी देखने को मिल रही थी। इसके बाद शक होने पर कैश काउंटिंग रूम में कुछ हिडन कैमरे लगवाए गए। कैमरे लगवाए जाने के कुछ हफ्तों बाद जब रिकॉर्डिंग चेक की गई, तब जाकर पूरे खेल का खुलासा हुआ। दरअसल नोटो की गिनती के बाद जब गड्डी बनाई जाती थी तब कुछ कर्मचारी जानबूझकर सीसीटीवी कैमरों के सामने खड़े हो जाते थे। इस दौरान बाकी लोग गड्डी बनाते थे साथ ही कुछ नोट कपड़ों के अंदर छिपा लेते थे। साथ ही गड्डीयों में एक्सट्रा नोट लगा देते थे। जिसे मंदिर से बैंक ले जाते समय रास्ते में निकाल लिया जाता था।

बैंक में गिनी जाती थी सिर्फ गड्डी

कई लोगों के मन में सवाल आ सकता है कि बैंक में पैसे जमा करवाते समय में कर्मचारियों की ये चोरी सामने आ सकती थी? फिर क्यों इसका खुलासा होने में इतना समय लग गया? इसका जवाब यह है कि बैंक मंदिर से आने वाले पैसों की गिनती किसी आम आदमी द्वारा जमा किए राशि की तरह करते ही नहीं थे। बैंक कर्मचारी केवल गड्डी की गिनती करते थे, न की हर नोट की। ऐसे में इस घोटाले में आने वाले समय में किसी बैंक कर्मचारी का नाम भी सामने आने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।

नही होती थी किसी की तलाशी

जांच में सामने आया है कि मंदिर के चढ़ावे की गिनती में शामिल किसी भी व्यक्ति की ड्यूटी खत्म होने या अंदर-बाहर जाने के दौरान किसी की भी तलाशी नहीं ली जाती थी। यह एक बड़ी लापरवाही थी जिस पर इससे पहले किसी ने ध्यान नहीं दिया। जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने धीरे-धीरे दान में चढ़ने वाले पैसों की चोरी करना शुरु कर दिया।

आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हो गए थे कि वो भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के गहनों तक की धड़ल्ले से चोरी कर रहे थे। आरोपी मंदिर के दान में मिलने वाले बाली, झुमकी, नथ, बाल रूप राम लाल के कंगन, पैजनिया जैसे जेवरात भी चोरी कर लेते थे। सबसे दिलचस्प बात ये है कि वो ये चोरी दान पेटी में मिले जेवरात की लिखा पढ़ी होने से पहले ही चुरा लेते थे। जिसके चलते उनकी चोरी लंबे समय तक छिपी हुई रही।

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