राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी का खुलासा, SIT को मिले अहम सबूत, जांच के घेरे में चंपत राय
Donation Scam: अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच कर रही SIT को महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। जांच में CCTV फुटेज से रकम के गबन के संकेत सामने आए हैं।
- Written By: दिव्या सिंह
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में जांच के घेरे में चंपत राय (सोर्स- सोशल मीडिया)
Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से कथित चोरी की जांच में बड़ा मोड़ सामने आया है। विशेष जांच टीम (SIT) को इस मामले में अहम सबूत मिले हैं, जिनमें CCTV फुटेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी अनियमितताएं शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, SIT की टीम को ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिनसे चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं। कुछ CCTV फुटेज के डिलीट किए जाने का भी शक जताया गया है, जिससे जांच की दिशा और गंभीर हो गई है। टीम ने अब तक लापरवाही और संभावित साजिश—दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की है।
बैंक कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज होने की संभावना
इस मामले में ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका को संदिग्ध माना गया है। वहीं, महासचिव चंपत राय भी जांच के घेरे में बताए जा रहे हैं। इसके अलावा टिन्नू यादव समेत कुछ कर्मचारियों और बैंक कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है।
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SIT ने पिछले छह दिनों में करीब 150 लोगों से पूछताछ की है, जिनमें ट्रस्ट के पदाधिकारी, प्रबंधन कर्मचारी और बैंक व TCS से जुड़े कर्मी शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रस्ट के 20 से 25 लोगों की लापरवाही या संलिप्तता हो सकती है।
मंदिर ट्रस्ट के संचालन में बड़े बदलाव की सिफारिश
सूत्रों के मुताबिक, SIT अपनी रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के संचालन में बड़े बदलाव की सिफारिश कर सकती है। इनमें ट्रस्ट का पुनर्गठन, काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति, चढ़ावे की गणना में पारदर्शिता बढ़ाना और समय-समय पर ऑडिट कराना शामिल हो सकता है।
इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, सिफारिश आधारित नियुक्तियों पर रोक लगाने, बैंकिंग कार्यों में नियमित कर्मचारियों की तैनाती और निगरानी तंत्र को मजबूत करने जैसे सुझाव भी दिए जा सकते हैं।
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SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है, जिसके बाद इस पूरे मामले में बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
