8 महीने का सीसीटीवी डेटा गायब! अयोध्या राम मंदिर चंदा घोटाले में SIT की जांच तेज, 250 लोगों से की पूछताछ
Ram Mandir Donation Case: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT की जांच से पता चला है कि काउंटिंग रूम का CCTV फुटेज डिलीट कर दिया गया था। चंपत राय और ट्रस्ट को कानूनी नोटिस भेजा गया है।
- Written By: प्रिया जैस
अयोध्या राम मंदिर (सौजन्य-IANS)
Ayodhya Ram Mandir Donation Case: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे गड़बड़ी के कई मामले सामने आ रहे है। इस बीच काउंटिंग रूम के सीसीटीवी फुटेड डिलीट होने की खबरें सामने आ रही हैं। एसआईटी को जांच में काउंटिंग सेंटर के सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए जाने के संकेत मिले हैं।
जांच को आगे बढ़ाने के लिए डीवीआर को दिल्ली की लैब में जांच के लिए भेजा गया है, जहां डेटा रिकवर करने की कोशिश की जाएगी। चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की टीम 250 से अधिक लोगों से पूछताछ कर रही है। इसमें मंदिर परिसर में काम करने वाले कर्मचारी और पदाधिकारी शामिल है। एसआईटी सभी के बयान दर्ज कर रही है।
8 महीने का डाटा डिलीट करने का आरोप
एसआईटी मंदिर के पुजारियों से भी लगातार पूछताछ कर रही है। एसआईटी, इस दौरान कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और उनकी जिम्मेदारियों की भी जांच कर रही है। जांच अधिकारियों ने ट्रस्ट के कार्यालय का निरीक्षण किया और सभी जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में लिए है।
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इससे पहले पूर्व लेखाकार महिपाल ने 8 महीने का डाटा डिलीट करने का आरोप लगाया था कि। उन्होंने कहा था कि उनके कार्यकाल के दौरान सीसीटीवी का करीब आठ महीने का डाटा डिलीट कर दिया गया था। इससे इस बात की संभावना सामने आ रही है कि रिकॉर्डिंग को एक से अधिक बार डिलीट किया गया है। इसकी पुष्टि के लिए तकनीकी जांच की जा रही है।
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राम मंदिर के खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
इस बीच राम मंदिर के चंदे और खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है। बिहार के बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह के वकील एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत ने गुरुवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टियों, महंत नृत्य गोपाल दास महाराज (अध्यक्ष), चंपत राय (महासचिव) और स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज (कोषाध्यक्ष) को एक कानूनी नोटिस भेजा। इस नोटिस में ट्रस्ट से नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच जमा हुए चंदे और किए गए खर्च का पूरा और मद-वार (टाइम-वाइज) ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
