Explained: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला, कैसे सामने आई गड़बड़ी…किस पर है आरोप; अब तक क्या-क्या हुआ?
Ayodhya Ram Temple Donation: अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले विनय कटियार ने इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। राम मंदिर पर लोग बलिदान हुए हैं।
- Written By: मनोज आर्या
अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद, (AI जेनरेटेड इमेज)
Ayodhya Ram Temple Donation Case Explained: अयोध्या का राम मंदिर पिछले कुछ दिन से काफी चर्चाओं में है। दरअसल, मंदिर के चढ़ावे में कथित तौर पर हेराफेरी के आरोप लगे हैं, जिसके बाद से तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, यह पूरा विवाद क्या है, मंदिर के चढ़ावे में कथित तौर पर गड़बड़ी का मामला कैसे सामने आया? मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी का आरोप किस पर लगा है और इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? आइए इस एक्सप्लेनर के जरिए सबकुछ विस्तार से समझते हैं। बीते 7 जून को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सबसे पहले अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी का आरोप लगया था।
सोशल प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पाई गई है। ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है। न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है।सरकार की चुप्पी संदिग्ध है।
अयोध्या डीएम शशांक त्रिपाठी का बयान
बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अयोध्या के डीएम शशांक त्रिपाठी ने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर जो भी आरोप लगाए गए हैं, उसको लेकर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इस पूरे केस की जांच की जा रही है। जांच में जो कुभी सामने आएगा उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और सभी जानकारियों को सार्वजनिक किया जाएगा।
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मामले की जांच के लिए SIT का गठन
मामले को तूल पकड़ता हुए देख उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। इस टीम में आईएस अधिकारी विजय विश्वास पंत, आईपीएस अधिकारी किरण एस और वित्त विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी सचिव नील रतन शामिल हैं। यह टीम सोमवार को अयोध्या पहुंच गई थी। जांच पूरी होने के बाद यह टीम अपनी रिपोर्ट यूपी सरकार को सौंपेगी। वहीं, विपक्षी पार्टियों ने एसआईटी पर सवाल उठावते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज से मामले की जांच कराने की मांग कर रही हैं।
कैसे सामने आया गड़बड़ी का मामला?
अयोध्या से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय का कहना है कि यह लूट कोई नई नहीं है। जब से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र नाम से ट्रस्ट बना है, तब से यहां भ्रष्टाचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले यहां जमीन के घोटाले की बात सामने आई थी। इसके बाद चढ़ावे के पैसे की गिनती करवाने वाले महीपाल सिंह ने चढ़ावे के पैसे की चोरी की शिकायत की थी लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। हम अयोध्या के रहने वाले हैं, हम देख रहे हैं जो मंदिर में दस-पंद्र हजार की नौकरी करते थे वो क्या से क्या हो गए।
हालांकि, इस बार इस मामले को राजनीतिक हवा तब मिली जब अखिलेश यादव ने इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट करते हुए राज्य सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने सरकार की स्थिति को भी संदिग्ध बताया था।
बीजेपी नेता ने जांच के लिए लिखा पत्र
7 जून को ही एक्स पर एक पोस्ट में अखिलेश यादव ने लिखा कि मंदिर ट्रस्ट के सभी मेंबर्स को एक साथ सामने आकर स्पष्टीकरण देना चाहिए और आंकड़ों के मिलान के लिए सीसीटीवी फूटेज का सहारा लिया जाए। जैसे ही ट्रस्ट के सभी लोग एक साथ बैठेंगे तो सच बाहर आ जाएगा, क्योंकि उनमें हर कोई एक जैसा नहीं है। इस गड़बड़ी की शंका के केंद्र में जो कोई एक व्यक्ति विशेष ही नहीं तो फिर किसी एक स्पष्टीकरण का क्या महत्व है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव पिछले नौ दिनों में राम मंदिर चंदे में कथित गड़बड़ी को लेकर अपने एक्स हैंडल से आठ पोस्ट कर चुके हैं।
विपक्षी नेताओं के अलावा अयोध्या के बीजेपी नेता रजनीश सिंह ने भी पीएम मोदी को लेटर लिखकर राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाई गई समर्पण निधि की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की अपील की है।
विनय कटियार ने गंभीर मामला बताया
अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले विनय कटियार ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। राम मंदिर पर लोग बलिदान हुए हैं। हमें और कल्याण सिंह को जेल भी जाना पड़ा था। कल्याण सिंह को इस्तीफा तक देना पड़ा। इस समय जितने हैं सब चोर हैं। इन सभी की छुट्टी विनय कटियार करेगा। ये सभी दो दिन के अंदर भाग जाएंगे या जेल में रहेंगे।
पूर्व लेखा प्रभारी ने की थी शिकायत
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में जनवरी 2021 से मई 2022 तक लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह ने भी मंदिर के दान में हेराफेरी का आरोप लगाय है। जब वह वहां अपनी सेवा दे रहे थे उस समय राम मंदिर में चढ़ावे की पैसे की गिनती उनकी निगरानी में होती थी। उनका कहना है कि जब चढ़ावे में गड़बड़ी की शिकायत कार्यालय की साप्ताहिक बैठक में की तो उनकी जगह अन्य लेखा प्रभारी की नियुक्ति कर दी गई, जिसके बाद उन्होंने राम मंदिर से खुद को दूर कर लिया।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बयान
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंदिर के चढ़ावे में किसी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि ट्रस्ट समय-समय पर ऑडिट करता रहता है। दान पेटी की गिनती कमरे का भी ऑडिट होता है। दान-पेटी काउंटिंग कमरे का ऑडिट ट्रस्ट के न्यासीगण, कार्यकर्ता और स्टेट बैंक के कर्मचारी मिलकर करते हैं। यह काम कई दिनों तक चलता है। यही काम आजकल हो रहा है। कोई भी गड़बड़ी की बात सामने नहीं आई है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, (सोर्स- सोशल मीडिया)
रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर आरोप
भाजपा के स्थानीय नेता रजनीश सिंह ने दोबारा लेटर लिखते हुए पीएम मोदी से कई बिंदुओं पर जांच की मांग की है। रजनीश सिंह चंपल राय के ड्राइवर रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू की ओर इशारा करते हुए कहा कि मंदिर में कोई एक कलम लेकर नहीं जा सकता, लेकिन टिन्नू की गाड़ी बिना किसी जांच के अंदर तक जाती है। इस लूट में टिन्नू उसका भतीजा मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनिल मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और अवनीश मिश्रा जैसे कई नाम हैं।
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एसआईटी का जांच रिपोर्ट का इंतजार
भाजपा नेता रजनीश सिंह ने आगे कहा कि इन सभी के पास आज करोड़ों रुपये की संपत्ति हो गई है जिसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक बड़ा चेन है और ये लोग उसकी कड़ी हैं। किसी सहयोगी को पकड़ने से कोई निष्कर्ष निकलने वाला नहीं है। इसके सरगना को पकड़ना जरूरी है। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी को लेकर तमाम दावे किए जा रहे हैं। लेकिन, अधिकारिक रूप से अभी तक कुछ सामने नहीं आया है। अब एसआईटी की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
