

Avimukteshwaranand Maharaj Statement: शनिवार को ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज अलीगढ़ के कस्बा छर्रा पंहुचे जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। यहां शंकराचार्य ने उपस्थित जनसमुदाय के सामने देश में गौ माता की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की। अतरौली रोड स्थित पंडाल में अपना स्थान ग्रहण करने के बाद जगद्गुरु शंकराचार्य ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए देश में गौ माता की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने जनता से सवाल पूछा कि गाय पशु है या माता? उन्होंने कहा कि जिस प्रश्न का स्वरूप साफ नहीं होता, उसका जवाब देना कठिन होता है। लेकिन यहां सवाल एकदम साफ है कि गाय हमारी माता है न की पशु। उन्होंने कहा कि आज से नहीं बल्कि भारत की संस्कृति ने लाखों वर्ष पहले ही यह घोषित कर दिया था कि गाय हमारी माता है। इसलिए हमारे मन में इसे लेकर कोई शंका नहीं होनी चाहिए।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने अंग्रेजों की व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने गाय को पशु का नाम दे दिया था। 90 साल की लड़ाई के हमने अंग्रेजो को भगा तो दिया लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण से उनकी व्यवस्था अभी सरकारी कार्यालयों में चल रही है। आजादी के 78 सालों बाद भी सरकारी रजिस्टरों और कागजों में सुधार नहीं हो पाया है और आज भी गाय को माता की बजाय पशु का दर्जा दे दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गाय को पशु कहना सही है? हमें इसका जवाब सरकार से पूछना चाहिए कि गाय पशु है या हमारी माता।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि भारत गाय को काटकर खाने वालों का नहीं, बल्कि यहां गाय की पूजा की जाती है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि गाय को काटकर खाने वाले लोग (गोघ्न) गौ रक्षक का भेष धारण कर लिए है। जिनकी पहचान करना बेहद जरूरी है। गाय काटने वालों और गाय पूजने वालों का समूह बिल्कुल अलग होना चाहिए।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने पंडाल में उपस्थित सभी लोगों को गौ रक्षा की शपथ दिलाई। उन्होंने गर्व से घोषणा करते हुए कहा कि मेरी गौ माता को पशु कहा जाना और उसे काटकर बेचना मुझे गहरी चोट पहुंचाता है। इसलिए ऐसा करने वालों से या उनसे संबंध रखने वालों से मेरे कोई नाता नहीं है। ऐसे लोग मेरे शत्रु समान हैं। उन्होंने कहा कि आज से मैं उनसे संबंध तोड़ता हूं, ताकि गौ हत्या जैसा महापाप मेरे मत्थे न मढ़े।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने अपने संदेश में राजनीतिक दलों को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने संकल्प लिया कि आगामी चुनावों में वे और सनातनी समाज केवल उसी को वोट देंगे जो गौ माता की रक्षा का संकल्प लेगा।
जो देगा गऊ माता को चोट, हम नहीं देंगे उसको वोट। जन्म-जन्म का नाता है, गऊ हमारी माता है।।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जिस पार्टी या नेता को हमारा वोट चाहिए, वह खुलेआम लिखकर और पढ़कर यह स्वीकार करें कि गाय उसकी भी माता है। वह पार्टी गाय के साथ माता जैसा व्यवहार करेगा। ऐसा संकल्प लेने वाले ही हमारे पास आए।