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Live-in Relationship पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना तलाक लिव-इन में नहीं रह सकते शादीशुदा जोड़े

Married Person Divorce: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि विवाहित व्यक्ति बिना तलाक के किसी तीसरे के साथ लिव-इन में नहीं रह सकता। कोर्ट ने स्वतंत्रता को सीमित बताते हुए सुरक्षा देने से मना कर दिया।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Mar 28, 2026 | 07:56 PM

इलाहाबाद हाई कोर्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Allahabad High Court Live-In Ruling: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर किसी व्यक्ति का जीवनसाथी जीवित है, तो वह बिना तलाक लिए किसी अन्य के साथ नहीं रह सकता। विवाहित जीवनसाथी के कानूनी अधिकार का उल्लंघन करने वाली ऐसी किसी भी व्यवस्था को कानूनन मान्यता नहीं दी जा सकती है। इलाहाबाद हाई कोर्ट का लिव-इन संबंध पर फैसले ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता असीमित नहीं हो सकती है।

कोर्ट का मुख्य फैसला

जस्टिस विवेक कुमार सिंह की सिंगल बेंच ने एक याचिका को निस्तारित करते हुए यह टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि विवाहित व्यक्ति बिना वैध तलाक के तीसरे पक्ष के साथ लिव-इन में नहीं रह सकता। कानून ऐसे रिश्तों को मंजूरी नहीं देता जहां एक साथी का वैधानिक अधिकार खतरे में पड़ता हो।

सुरक्षा की मांग खारिज

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अपने शांतिपूर्ण जीवन में हस्तक्षेप न करने और पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। उन्होंने दलील दी कि वे पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे हैं लेकिन परिजनों से खतरा है। हालांकि अदालत ने अनुच्छेद 226 के तहत उन्हें सुरक्षा प्रदान करने से पूरी तरह इनकार कर दिया।

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स्वतंत्रता और प्रतिबंध

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि वयस्कों को अपनी मर्जी से साथ रहने का अधिकार प्राप्त है। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार पूर्ण या पूरी तरह असीमित नहीं है। यह अधिकार तब समाप्त होता है जब दूसरे व्यक्ति का वैधानिक अधिकार शुरू होता है।

पति-पत्नी के अधिकार

अदालत के अनुसार पति और पत्नी को अपने साथी के साथ रहने का पूर्ण वैधानिक अधिकार प्राप्त है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर किसी को भी इस कानूनी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। इसलिए विवाहित साथी के रहते तीसरे व्यक्ति के साथ रहना पूरी तरह अवैध माना जाएगा।

राज्य सरकार का तर्क

राज्य सरकार ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पहले से ही विवाहित हैं। सरकार की ओर से दलील दी गई कि बिना सक्षम न्यायालय से तलाक लिए यह कृत्य अवैध है। याचिकाकर्ताओं ने अभी तक तलाक की कोई भी कानूनी डिक्री हासिल नहीं की थी।

हिंसा पर पुलिस सहायता

यद्यपि कोर्ट ने सुरक्षा नहीं दी, लेकिन कहा कि हिंसा होने पर वे पुलिस से संपर्क कर सकते हैं। याचिकाकर्ता अपनी सुरक्षा के लिए संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या एसपी को आवेदन दे सकते हैं। पुलिस अधिकारी आवेदन का सत्यापन करने के बाद कानून के मुताबिक आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

यह भी पढ़ें: क्या बदल जाएगा चुनाव का सिस्टम? सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने की उठी मांग

सामाजिक और कानूनी असर

यह फैसला समाज में विवाह की संस्था को मजबूत करने और कानूनी मर्यादा बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम है। कोर्ट ने साफ किया कि लिव-इन का दावा करने मात्र से अवैध संबंध वैध नहीं हो जाते। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन करना और तलाक लेना अनिवार्य शर्त है।

Allahabad high court decision married people live in relationship without divorce order

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Published On: Mar 28, 2026 | 07:56 PM

Topics:  

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