EXPLAINER: बायोमेट्रिक वोटिंग सिस्टम कैसे करेगा फर्जी वोटिंग खत्म? जानिए इसके फायदे, चुनौतियां और असर

Biometric Voting System: सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में मतदान केंद्रों पर बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने की मांग की गई है।
Biometric Voting System
प्रतीकात्मक इमेज (सोर्स- एआई जनरेटेड)
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Supreme Court PIL: सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में इलेक्शन कमीशन को निर्देश देने की मांग की गई है कि आगामी विधानसभा चुनावों में मतदान केंद्रों पर फिंगर और आईरिस आधारित बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू की जाए। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है।

याचिका में कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में डुप्लिकेट वोटिंग, इंपर्सनेशन (किसी और के नाम पर वोट डालना) और घोस्ट वोटिंग जैसी अनियमितताएं लगातार सामने आ रही हैं। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए निर्वाचन प्रक्रिया को और ज्यादा पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की मांग की है।

मतदान केंद्रों का हो मॉडर्नाइजेशन

याचिका के जरिए यह मांग रखी गई है कि चुनाव आयोग मतदान केंद्रों पर फिंगरफ्रिंट और आईरिस आधारित सिस्टम शुरू करे। जिससे केवल वैध वोटर ही वोट डाल सके। जिससे 'एक नागरिक, एक वोट' के सिद्धांत को सख्ती से लागू किया जा सकेगा। वर्तमान में मतदाता पहचान पत्र और मैनुअल वेरिफिकेशन पर निर्भरता के कारण पुरानी तस्वीरें, रिकॉर्ड से जुड़ी त्रुटियां और रियल-टाइम सत्यापन की कमी जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। इस वजह से दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।

क्या ऐसा करना मुमकिन है?

दरअसल, याचिका में संविधान के आर्टिकल 324 के तहत इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की शक्तियों का हवाला देते हुए कहा गया है कि आयोग नियमों में संशोधन कर इस तकनीक को लागू करने में सक्षम है। इससे प्रवासी मतदाताओं, डुप्लिकेट नामों और फर्जी वोटिंग जैसी समस्याओं का समाधान हो सकता है। साथ ही, रीयल-टाइम ऑडिट ट्रेल तैयार होने से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

और भी क्षेत्रों में उपयोग हो रही यह तकनीक

याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह व्यवस्था आधार जैसी मौजूदा पहचान प्रणालियों और अन्य सरकारी क्षेत्रों में उपयोग हो रही आधुनिक तकनीक के अनुरूप होगी। 28 मार्च को इसी मांग को लेकर चुनाव आयोग को एक प्रतिनिधित्व भी सौंपा गया था लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में मामले में हस्तक्षेप के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया है। याचिका में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अन्य आवश्यक निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है।

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