अपने पार्टी नेताओं के साथ अखिलेश यादव। इमेज-सोशल मीडिया
Akhilesh Yadav On Yogi Adityanath : उत्तर प्रदेश के स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य करने के सरकारी आदेश ने राज्य की सियासत में एक नया उबाल पैदा कर दिया है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इसे राष्ट्रभक्ति से जोड़ रही है। वहीं, विपक्ष इसे इतिहास और निष्ठा के चश्मे से देख रहा है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला बोलते हुए उनके अतीत और विचारधारा पर सवाल उठाए। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बिष्ट जी पहले अपने लोगों से पूछ लें कि उन्होंने आजादी से पहले कब वंदे मातरम गाया था? उनके अनरजिस्टर्ड संघी साथी तब कहां थे? वे तो उस वक्त मुखबिरी में व्यस्त थे। अखिलेश के इस बयान ने भाजपा और संघ के पुराने इतिहास को लेकर चल रही बहस को फिर से हवा दे दी है।
सोमवार को विधान परिषद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया। उन्होंने वंदे मातरम को अनिवार्य करने के फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। सीएम योगी ने कहा कि वंदे मातरम हमारी आन-बान और शान का प्रतीक है। राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और तिरंगे का अपमान करना सीधे तौर पर बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान का अनादर करना है।
योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि यह पार्टी हमेशा से राम मंदिर और काशी विश्वनाथ जैसे आस्था के केंद्रों का विरोध करती रही है। उन्होंने आगे जोड़ा कि सपा गाजी मेले का समर्थन करती है, जबकि उनकी सरकार ने बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक बनाकर असली नायकों को सम्मान दिया है।
“इन्होंने न वंदे मातरम् आजादी के पहले गाया था, मुख्यमंत्री बिष्ट जी अपने लोगों से तो पूछ लें कि उनके अनरजिस्टर्ड संघी साथियों ने कब वंदे मातरम् गाया था, जब वो मुखबिरी में व्यस्त थे। – माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/JAZ3wtixHK — Akhilesh Yadav (Son Of PDA) (@SocialistLeadr) February 16, 2026
यह भी पढ़ें : अखिलेश यादव का केंद्र पर तंज, किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, अब युवाओं को कॉन्ट्रैक्ट पर रखेगी सरकार- VIDEO
इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि क्या यह फैसला केवल शिक्षा तक सीमित है या इसके पीछे ध्रुवीकरण की बड़ी रणनीति है। विपक्षी दल इसे मदरसों को निशाना बनाने की कोशिश बता रहे हैं। सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रीय एकता का सूत्र मान रहा है। बहरहाल, सदन से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर तकरार जारी है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के आसार हैं।