विधानसभा चुनाव 2027 से पहले फिर साथ आएंगे बुआ-बबुआ? 'बहुजन समाज' को लेकर अखिलेश के बयान से सियासी पारा हाई

BSP-SP Alliance: विपक्ष की एकता के पिछले प्रयासों को लेकर अखिलेश ने कहा कि बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर और राम मनोहर लोहिया ने एक बार राजनीति को नयी दिशा देने के लिए मिलकर काम करने का प्रयास किया।
Will akhilesh mayawati reunite before the 2027 assembly elections? Akhilesh's statement about the "Bahujan Samaj" has raised political heat
अखिलेश यादव, मायावती (File Photo)
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UP Politics: उत्तर प्रदेश में चुनाव में अभी करीब एक साल का वक्त बचा है। इससे पहले राज्य के सियासत का रुख तेजी से बदल रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ का मुकाबला करने के लिए क्या अखिलेश और मायावती साथ आ सकते हैं? अब यह सवाल इसलिए क्योंकि सपा अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खुद रविवार को कहा कि बहुजन समाज और सपा के बीच संबंध मजबूत हो रहे हैं तथा भविष्य में और भी गहरे होंगे। इस दौरान मायावती के कभी करीबी रहे और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत विभिन्न दलों के 15,000 से अधिक सदस्यों ने सपा की सदस्यता ली।

जिस भी पार्टी में रहा, अखिलेश को मानता रहा: नसीमुद्दीन

समाजवादी पार्टी में शामिल होते हुए नसीमुद्दीन सिद्दिकी ने कहा कि पार्टी में शामिल होने के बाद वे सबसे जूनियर सदस्य हैं और बाकी सभी नेता उनके सीनियर हैं। उन्होंने Akhilesh Yadav की तारीफ करते हुए कहा कि वे जिस भी दल में रहे, हमेशा अखिलेश यादव को अपना नेता मानते रहे। अखिलेश की प्रशंसा में उन्होंने शायरी भी पढ़ी-“हयात लेकर चलो, कायनात लेकर चलो, चलो तो सारे जमाने को साथ लेकर चलो।” उन्होंने 2027 के चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि लक्ष्य साफ है, सरकार बदलनी है और अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है।

‘पीडीए’ से मजबूत होगी सामाजिक एकता

अखिलेश यादव ने कार्यक्रम को “पीडीए का प्रेम प्रसार समारोह” बताते हुए कहा कि इससे समाज में भाईचारा और सहयोग की भावना मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को साथ लाने के लिए ‘पीडीए’ शब्द गढ़ा गया था। उनके मुताबिक, शांति और प्रगति की बुनियाद सामाजिक एकता पर टिकी है और इसी सोच के तहत ‘पीडीए होली मिलन’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सपा में शामिल होने वालों में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के अलावा अपना दल (सोनेलाल) के पूर्व विधायक राजकुमार पाल भी शामिल हैं। सिद्दीकी, जो कभी Mayawati के करीबी रहे और बसपा सरकार में चार बार मंत्री रह चुके हैं, 2017 में बसपा से निष्कासित हुए थे। बाद में वे कांग्रेस में गए और हाल ही में वहां से भी अलग हो गए।

गठबंधन पर क्या बोले अखिलेश?

अखिलेश यादव ने कहा कि यह राजनीतिक एकजुटता पीडीए की संभावनाओं को और मजबूत करेगी। उन्होंने याद दिलाया कि B. R. Ambedkar और Ram Manohar Lohia ने भी मिलकर राजनीति को नई दिशा देने की कोशिश की थी, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि अतीत में गठबंधन बने और टूटे, लेकिन भविष्य में संघर्ष को और मजबूती से आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

सपा और बसपा 1993 और 2019 में भी साथ आ चुके हैं, हालांकि दोनों बार गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया। संकेतों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए अखिलेश ने शंकराचार्य विवाद का जिक्र किया और कहा कि सपा पीड़ितों के साथ खड़ी है। उनका कहना था कि परंपराओं पर सवाल उठाने और प्रमाणपत्र मांगने की प्रवृत्ति ठीक नहीं है।

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