अखिलेश यादव, (सपा, प्रमुख)
Akhilesh Yadav On UP Budget 2026: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यूपी बजट की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बीजेपी का विदाई बजट है जिसके साथ उनकी विदाई भी तय है। अखिलेश ने सवाल उठाया कि सरकार बजट का आकार तो बढ़ा रही है, लेकिन स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 60 प्रतिशत राशि भी खर्च नहीं कर पाई है।
सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश को 90 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए 30 प्रतिशत की ग्रोथ रेट चाहिए, जो वर्तमान हालातों में नामुमकिन है। किसानों की आय और बेरोजगारी पर सरकार का कोई ठोस प्लान नहीं है।
अखिलेश यादव ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार अपनी उपलब्धि गिना रही है, लेकिन असलियत यह है कि वह आवंटित धन का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं कर पा रही है। कृषि विभाग में केवल 57 प्रतिशत, स्वास्थ्य में 58 और बेसिक शिक्षा में महज 62 प्रतिशत बजट ही खर्च हो पाया है। उन्होंने पूछा कि जब पुराना बजट ही खर्च नहीं हुआ, तो नए बड़े बजट से जनता का क्या भला होगा। एमएसएमई और कृषि क्षेत्र को मिलने वाला जरूरी सहयोग भी गायब है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के 50 लाख करोड़ के निवेश दावों (MOU) पर सवालिया निशान लगाया। उन्होंने कहा कि अगर निवेश जमीन पर उतरा होता, तो सरकार को दोबारा रोजगार देने की बात नहीं कहनी पड़ती। अखिलेश के मुताबिक, सरकार प्रति व्यक्ति आय के मामले में दूसरे देशों से बहुत पीछे है और राशन पाने वालों की असली आय छिपा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा सरकारी अस्पतालों को ठप कर स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने की है।
यह भी पढ़ें: प्रियंका गांधी ने उकसाया…तो कांग्रेस सांसदों ने ओम बिरला को दी गालियां, किरेन रिजिजू का विपक्ष पर बड़ा आरोप
गन्ने के रेट और किसानों की दोगुनी आय के वादे पर अखिलेश यादव ने कहा कि नई डील के बाद किसान और एमएसएमई क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। यूपी में रजिस्टर्ड एमएसएमई इकाइयों तक भी सरकार की पहुंच नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या तो बढ़ा दी गई, लेकिन वहां इलाज की व्यवस्था पूरी तरह नदारद है। सपा प्रमुख ने इसे केवल कागजी बजट बताते हुए जनता की उम्मीदों के साथ खिलवाड़ करार दिया।