आगरा में 18वें ‘मीट एट आगरा’ का आगाज; पहली बार पहुंचा चाइनीज डेलीगेशन, फुटवियर उद्योग में दिखे नए अवसर

Meet at Agra 2026: ट्रेड सेंटर में 18वें ‘मीट एट आगरा’ का आयोजन हो रहा है। पहली बार चाइनीज डेलीगेशन की भागीदारी से फुटवियर उद्योग में तकनीक, कंपोनेंट-वैश्विक कारोबार के नए अवसरों पर चर्चा तेज हुई है।
Meet at Agra 2026: Chinese Delegation Joins Footwear Expo, Agra Industry Eyes Global Market
‘मीट एट आगरा’(सोर्स- नवभारत लाइव)
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Agra Footwear Manufacturers: ताजनगरी आगरा का फुटवियर उद्योग अब केवल देश के बाजार तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी मजबूत जगह बनाने की तैयारी कर रहा है। इसी दिशा में सींगना स्थित आगरा ट्रेड सेंटर में AFMAC (Agra Footwear Manufacturers & Exporters Chamber) की ओर से 3 से 5 अक्टूबर तक 18वें ‘मीट एट आगरा’ का आयोजन किया जा रहा है। इस बार का आयोजन इसलिए खास है क्योंकि पहली बार चाइनीज डेलीगेशन भी इसमें हिस्सा ले रहा है।

‘मीट एट आगरा’ का उद्देश्य आगरा के चर्म एवं फुटवियर उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ नई तकनीक, आधुनिक मशीनरी, कंपोनेंट और कारोबार की संभावनाओं को बढ़ावा देना है। आयोजन में देशभर से फुटवियर उद्योग से जुड़े कारोबारी, ट्रेडर्स और एक्सपोर्टर्स हिस्सा ले रहे हैं। दुनिया के विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों के बीच चीन की भागीदारी को उद्योग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चीन की बड़ी प्रोडक्शन क्षमता बनी चुनौती

‘नवभारत’ से बातचीत में फुटवियर उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने भारत और चीन के उत्पादन मॉडल में अंतर को सामने रखा। कारोबारियों के मुताबिक चीन की सबसे बड़ी ताकत उसकी बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता और आधुनिक तकनीक है। अधिक उत्पादन के कारण वहां फुटवियर की लागत कम आती है, जिससे वैश्विक बाजार में चीन के उत्पाद प्रतिस्पर्धी बने रहते हैं।

‘मीट एट आगरा’
‘मीट एट आगरा’(सोर्स- नवभारत लाइव)
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कारोबारियों के अनुसार आगरा और चीन के फुटवियर में करीब 50 से 60 प्रतिशत तक अंतर दिखाई देता है। भारतीय फुटवियर उद्योग में अब भी बड़ी मात्रा में चमड़े का इस्तेमाल होता है, जबकि चीन में मिक्स्ड लेदर, सिंथेटिक और फैब्रिक जैसे विकल्पों का व्यापक इस्तेमाल किया जाता है। इससे उत्पादन लागत कम करने और अलग-अलग बाजारों की जरूरत के मुताबिक उत्पाद तैयार करने में मदद मिलती है।

व्यापारियों का कहना है कि भारतीय फुटवियर उद्योग को भी पारंपरिक उत्पादन पद्धतियों के साथ आधुनिक तकनीक, नए मटेरियल और बड़े पैमाने पर उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।

‘ऐसा कोई फुटवियर प्रोडक्ट नहीं, जो मीट एट आगरा में नहीं’

AFMAC के पूर्व अध्यक्ष पूरन डावर ने ‘नवभारत’ से बातचीत में कहा कि ‘मीट एट आगरा’ में दुनिया के फुटवियर उद्योग से जुड़े लगभग हर तरह के उत्पाद और कंपोनेंट देखने को मिल रहे हैं। उनके मुताबिक आने वाला समय आगरा और भारत के फुटवियर उद्योग के लिए अवसरों से भरा हुआ है।

उन्होंने कहा कि चाहे आगरा का बाजार हो, देश का बाजार हो या फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए दुनिया के बाजारों में जीरो ड्यूटी के अवसर हों, संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में उद्योग से जुड़े लोगों के साथ युवाओं को भी इस क्षेत्र में आने के लिए तैयार रहना होगा।

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पूरन डावर ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट में तनाव जैसी वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत में फुटवियर उद्योग के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। आने वाला समय युवाओं के लिए नए रास्ते खोल सकता है।

चीन से फुटवियर नहीं, अब कंपोनेंट लेने और यहीं बनाने की तैयारी

पूरन डावर के मुताबिक चीन आज भी उत्पादन के मामले में भारत से काफी आगे है, लेकिन भारत ने चीन के साथ प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सहयोग का रास्ता भी तलाशना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि चीन से तैयार फुटवियर लेने के बजाय अब फुटवियर कंपोनेंट लेने पर बातचीत हो रही है।

उनके मुताबिक शुरुआत में चीन से कंपोनेंट लिए जा सकते हैं, लेकिन आगे इन्हीं कंपोनेंट का उत्पादन भारत में करने की दिशा में काम किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर चीन के साथ ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से आगरा या देश के दूसरे हिस्सों में कंपोनेंट निर्माण की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी कोई चीज नहीं है, जिसे भारत में तैयार नहीं किया जा सकता। जरूरत केवल तकनीक, निवेश, आधुनिक उत्पादन प्रणाली और सही दिशा में काम करने की है।

‘चीन का बना जूता ढूंढने पर भी नहीं मिलता, कंपोनेंट जरूर दिखते हैं’

पूरन डावर ने कहा कि कुछ समय पहले तक देशभर में बड़ी संख्या में चीन में बने जूते दिखाई देते थे, लेकिन अब भारतीय बाजार में चीन का बना तैयार जूता तलाशने पर भी आसानी से नहीं मिलता। दूसरी ओर चीन से आने वाले फुटवियर कंपोनेंट देशभर में दिखाई देते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत अब उन्हीं कंपोनेंट के आधार पर वही डिजाइन और क्वालिटी देश में तैयार करने की क्षमता विकसित कर रहा है। यह बदलाव भारतीय फुटवियर उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

‘मीट एट आगरा’ इसी बदलाव की तस्वीर पेश कर रहा है, जहां चीन समेत दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि भारतीय कारोबारियों के साथ एक मंच पर हैं। ऐसे में यह आयोजन केवल उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि आगरा के फुटवियर उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा मंच बनकर सामने आया है।

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