

रेलवे कर्मचारियों के परिजन निभा रहे श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की भूमिका
पेशेवर कलाकारों के बिना छह दशक से अधिक समय से हो रहा मंचन
रेलवे परिवार के कलाकार दे रहे संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश
Railway Ramlila Tradition: आधुनिकता की दौड़ और बदलती जीवनशैली के बीच भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में रामलीला आज भी अहम भूमिका निभा रही है। आगरा में उत्तर मध्य रेलवे के गोवर्धन स्टेडियम में आयोजित होने वाली रामलीला इसकी अनूठी मिसाल है। यहां बीते छह दशकों से अधिक समय से प्रभु श्रीराम के जीवन प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस रामलीला में अभिनय करने वाले कलाकार कोई पेशेवर कलाकार नहीं, बल्कि रेलवे कर्मचारियों के परिजन हैं। उनका यह प्रयास धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बन रहा है।
केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो.एसपी सिंह बघेल ने नवभारत से विशेष बातचीत में रामलीला के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज जब युवा पीढ़ी अपनी परंपराओं और संस्कृति से दूर होती दिखाई दे रही है, ऐसे में रामलीला जैसे आयोजन नई पीढ़ी को प्रेरणा देने और भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, आदर्शों और संस्कारों को समाज तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित गोवर्धन स्टेडियम में आयोजित रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता इसका पारिवारिक जुड़ाव है। यहां प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और रामभक्त हनुमान सहित विभिन्न पात्रों की भूमिका रेलवे कर्मचारियों के परिजन निभाते हैं। इन किरदारों को जीवंत करने के लिए कलाकार पहले से ही अभ्यास शुरू कर देते हैं और मंच पर अपने अभिनय के जरिए रामायण के प्रसंगों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करते हैं।
रामलीला के मंचन के दौरान स्टेडियम में श्रद्धालुओं और दर्शकों की मौजूदगी माहौल को भक्तिमय बना देती है। रेलवे कर्मचारी ही नहीं, आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोग भी रामलीला देखने पहुंचते हैं। प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों के मंचन के बीच गूंजते जयकारे श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह को दर्शाते हैं।
गोवर्धन स्टेडियम की रामलीला वर्षों से आगरा के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। छह दशकों से अधिक समय से जारी यह परंपरा बताती है कि किसी सांस्कृतिक आयोजन को जीवंत बनाए रखने के लिए केवल पेशेवर कलाकारों की जरूरत नहीं होती, बल्कि समर्पण, सामूहिक भागीदारी और परंपरा के प्रति लगाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
रामलीला के आयोजनों में सांसद, विधायक, पार्षद और अन्य गणमान्य लोग भी शामिल होते हैं। रेलवे अधिकारियों का जुड़ाव भी इस आयोजन को संस्थागत और पारिवारिक सहयोग प्रदान करता है। इस तरह यह आयोजन रेलवे परिवार के सदस्यों को एक साझा सांस्कृतिक मंच पर जोड़ने का काम भी करता है।
रामलीला आयोजन से जुड़े राकेश कनौजिया ने नवभारत से बातचीत में कहा कि इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सभी कलाकार रेलवे परिवार से जुड़े हैं। कोई भी पेशेवर कलाकार नहीं है, इसके बावजूद कलाकार पूरी निष्ठा और तैयारी के साथ रामायण के प्रसंगों का मंचन करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, कर्तव्य और मर्यादा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। रामलीला के माध्यम से दर्शकों को यह संदेश मिलता है कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अच्छे कर्मों के मार्ग पर चलना चाहिए।
राकेश कनौजिया के मुताबिक, रामलीला जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब युवा स्वयं किसी पात्र का अभिनय करते हैं या मंचन को करीब से देखते हैं, तो वे रामायण के आदर्शों और प्रसंगों को केवल सुनते ही नहीं, बल्कि उन्हें समझने और आत्मसात करने का अवसर भी पाते हैं।
राकेश कनौजिया ने भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि रामलीला जैसे सांस्कृतिक आयोजन युवाओं को अपनी विरासत से जोड़ने और धार्मिक मूल्यों के प्रति निष्ठा मजबूत करने में सहायक हैं। उन्होंने धर्मांतरण को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
कुल मिलाकर, गोवर्धन स्टेडियम की रामलीला केवल मंच पर रामायण के प्रसंगों का चित्रण नहीं है। यह छह दशकों से अधिक समय से चली आ रही ऐसी परंपरा है, जिसमें रेलवे परिवार के सदस्य अपनी भागीदारी से संस्कृति की मशाल आगे बढ़ा रहे हैं। बदलते दौर में इस आयोजन का संदेश स्पष्ट है - परंपराएं तभी जीवंत रहती हैं, जब अगली पीढ़ी उनसे जुड़कर उन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाती है।